उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों का तीर अब सड़कों और हाईवे पर पोस्टरों के जरिए नजर आने लगा है। पश्चिमि उत्तर प्रदेश के बागपत समेत मेरठ, गाजियाबाद और हापुड़ के हाईवे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ कई आपत्तिजनक और तंज भरे पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
क्या है पोस्टर विवाद का पूरा मामला?
- ‘चवन्नी से रुपया’ का तंज: हाल ही में अखिलेश यादव ने रालोद (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी पर निशाना साधते हुए बयान दिया था कि “जिसे चवन्नी से रुपया बना दिया, वह भी छोड़कर चले गए।”
- पोस्टर वार की शुरुआत: इस बयान के विरोध में बागपत और आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना किसी पार्टी या संस्था के नाम के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टर लगा दिए गए।
- पोस्टर में दर्ज बातें: पोस्टरों पर अखिलेश यादव की एक हँसती हुई तस्वीर के साथ सबसे ऊपर लिखा गया है— “सबको गाली, सबका अपमान, समाजयादव पार्टी की यही पहचान।” इसके अलावा पोस्टरों में ‘चवन्नी’ वाले बयान के साथ-साथ सपा नेताओं की अन्य जातियों पर की गई कथित विवादित टिप्पणियों का भी जिक्र करते हुए नीचे ‘जातिवादी सपाई’ लिखा गया है।
पोस्टर विवाद के पीछे के मुख्य राजनीतिक कारण
| पहलू | मुख्य बिंदु / प्रभाव |
| जाटलैंड में स्वाभिमान की जंग | ‘चवन्नी’ टिप्पणी को पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी और जाट समुदाय के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। |
| सहारनपुर रैलियों से पहले का माहौल | 3 सितंबर को सहारनपुर में जयंत चौधरी की ‘स्वाभिमान रैली’ और 6 सितंबर को अखिलेश यादव का ‘युवा योद्धा सम्मेलन’ होने वाला है। रैलियों से ठीक पहले यह पोस्टर वार शुरू हुआ है। |
| विपक्षी दलों के हमले | बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश के ‘चवन्नी’ वाले बयान को अमर्यादित और शर्मनाक करार देते हुए माफी की मांग की थी। |
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
बागपत में हाईवे पर लगे इन पोस्टरों को लेकर समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए पुलिस और प्रशासन से आपत्तिजनक होर्डिंग्स हटाने और इन्हें लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। सपा नेताओं का कहना है कि यह हमला अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाकर किया गया है।


