आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस ‘महा-दलबदल’ पर समाज सेवक अन्ना हजारे, विपक्षी दलों और खुद आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
अन्ना हजारे: “अपने मतलब के लिए पार्टी बदलना गलत”
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में समाज सेवक अन्ना हजारे ने इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना पूरी तरह गलत है। अन्ना ने जोर देकर कहा, “अपने मतलब के लिए राजनीतिक पार्टी बदलना सही बात नहीं है। हमारा देश संविधान के हिसाब से चलता है और संविधान में इस तरह के आचरण का समर्थन नहीं है। संविधान सर्वोपरि है, और जो हो रहा है वह ठीक नहीं है।”
AAP का पलटवार: “ये सात सांसद नहीं, सात गद्दार हैं”
पार्टी में हुई इस बड़ी टूट पर ‘आप’ की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बागियों को ‘गद्दार’ करार देते हुए कहा कि पंजाब के लोगों के मुद्दे उठाने के लिए जिन्हें राज्यसभा भेजा गया था, उन्होंने उस पार्टी का दामन थाम लिया जिसने किसानों को ‘आतंकवादी’ कहा। उन्होंने 750 किसानों की शहादत और लखीमपुरी खीरी जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे पंजाब और पार्टी के साथ बड़ा विश्वासघात बताया।
विपक्ष की चिंता: “लोकतंत्र को लगा झटका”
RJD नेता मनोज कुमार झा ने इस घटनाक्रम को केवल एक पार्टी की हार नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि सांसदों का इस तरह पाला बदलना अंततः लोकतांत्रिक कार्यशैली और व्यवहार को गहरी चोट पहुँचाता है।
प्रवेश वर्मा का ‘शीशमहल 2’ पर हमला
एक तरफ सांसदों का पलायन जारी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
- ‘रहमान डकैत’ और शीशमहल: प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल की तुलना ‘रहमान डकैत’ (फिल्म ‘धुरंधर 2’ के एक संदर्भ के रूप में) से करते हुए कहा कि दिल्ली के बाद अब पंजाब में भी सरकारी आवासों पर कब्जा कर ‘शीशमहल 2’ तैयार किया गया है।
- 95 लोधी स्टेट: उन्होंने केजरीवाल के नए आवास (95 लोधी स्टेट) के भव्य लेआउट को दिखाते हुए तंज कसा कि जितना दिमाग उन्होंने कमरों की सजावट और विलासिता पर लगाया है, उतना अगर दिल्ली के विकास पर लगाया होता, तो आज उनकी पार्टी नहीं टूट रही होती।
इस सियासी उठापटक ने पंजाब और दिल्ली की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है, जहाँ एक तरफ दलबदल की नैतिकता पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोपों ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।


