More
    HomeHindi NewsDelhi Newsमोदी ने जोर से मिलाया हाथ तो फूल गई ट्रंप की सांस!...

    मोदी ने जोर से मिलाया हाथ तो फूल गई ट्रंप की सांस! पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने सुनाया मजेदार किस्सा

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। बोल्टन के मुताबिक, एक बार मोदी ने ट्रंप से इतनी मजबूती से हाथ मिलाया कि उनकी सांस फूल गई। इस किस्से के जरिए बोल्टन ने ट्रंप के खुद को ताकतवर दिखाने वाले अंदाज पर भी तंज कसा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के संबंधों में व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर कई चुनौतियां चर्चा में हैं।

    ट्रंप की ताकत दिखाने की कोशिश पर बोल्टन का तंज

    नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बोल्टन ने यह किस्सा ट्रंप की उस छवि पर कटाक्ष करते हुए सुनाया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति खुद को बेहद शक्तिशाली दिखाने की कोशिश करते हैं। बोल्टन का कहना था कि मोदी के साथ हाथ मिलाने के दौरान ट्रंप की सांस फूलने का प्रसंग दोनों नेताओं की शारीरिक मजबूती को लेकर उनके तंज का हिस्सा था। हालांकि, यह बोल्टन का बताया हुआ किस्सा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

    बोल्टन, ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे थे। सितंबर 2019 में ट्रंप ने उन्हें इस पद से हटा दिया था। इसके बाद से बोल्टन कई मौकों पर ट्रंप की विदेश नीति और उनके फैसलों की आलोचना करते रहे हैं। भारत के साथ अमेरिकी संबंधों को लेकर भी वह ट्रंप प्रशासन के रुख पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भारत-अमेरिका संबंधों पर भी उठा चुके हैं सवाल

    बोल्टन का मानना है कि भारत से दूरी बनाना अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने भारत पर रूसी तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर दबाव बनाने और भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने की नीति की आलोचना की है। उनके मुताबिक, इस तरह के कदमों से अमेरिका अपने व्यापक रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा है। हालांकि, हाल के समय में टैरिफ, रूसी तेल की खरीद और क्षेत्रीय रणनीति जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी ठहराव की स्थिति में बताई गई थी।

    G2 की अवधारणा पर भी जताई नाराजगी

    बोल्टन ने अमेरिका और चीन के बीच संभावित करीबी साझेदारी यानी G2 की अवधारणा पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि यदि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देते हुए भारत को नजरअंदाज करता है, तो इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    उनके अनुसार, चीन की बढ़ती क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। इसलिए वाशिंगटन को नई दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

    इस तरह, मोदी और ट्रंप के हाथ मिलाने से जुड़ा बोल्टन का किस्सा केवल एक व्यक्तिगत मुलाकात का रोचक प्रसंग नहीं है, बल्कि इसके जरिए उन्होंने ट्रंप के सार्वजनिक व्यक्तित्व और उनकी विदेश नीति पर भी कटाक्ष किया। हालांकि, दोनों नेताओं के रिश्तों का वास्तविक आकलन ऐसे किस्सों के बजाय उनके आधिकारिक संवाद, नीतिगत फैसलों और द्विपक्षीय सहयोग के आधार पर किया जाना चाहिए। जून 2026 में दोनों नेताओं की मुलाकात में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments