भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का कार्यकाल कई बड़ी उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों के लिए भी चर्चा में रहा। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने आईसीसी की तीन बड़ी ट्रॉफियां जीतीं, लेकिन कुछ खिलाड़ियों को टीम में मौका देने और सीनियर खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर उनके फैसलों पर सवाल भी उठे। पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर ने अब अगरकर के कार्यकाल की समीक्षा करते हुए सात खिलाड़ियों का जिक्र किया है, जिनके साथ चयन के मामले में बेहतर व्यवहार किया जा सकता था।
जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर चर्चा के दौरान माना कि अगरकर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने 2024 टी20 विश्व कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 टी20 विश्व कप अपने नाम किया। हालांकि, जाफर के मुताबिक, टीम की इन सफलताओं के बावजूद कुछ खिलाड़ियों के चयन और उन्हें संभालने के तरीके पर बहस होनी चाहिए।
रोहित-विराट के साथ व्यवहार पर भी सवाल
जाफर ने जिन खिलाड़ियों का नाम लिया, उनमें रोहित शर्मा और विराट कोहली भी शामिल हैं। दोनों दिग्गजों के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास और भविष्य को लेकर चयन संबंधी चर्चाएं लगातार सुर्खियों में रही थीं। जाफर का मानना है कि इतने बड़े खिलाड़ियों के साथ संवाद और उनके भविष्य को लेकर स्पष्टता बेहतर हो सकती थी।
रोहित और विराट के मामले में बहस केवल टीम में जगह की नहीं थी, बल्कि इस बात की भी थी कि भारतीय क्रिकेट में बदलाव की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाए। हालांकि, दोनों खिलाड़ियों के करियर से जुड़े फैसलों के लिए अकेले चयनकर्ता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसमें खिलाड़ियों की अपनी प्राथमिकताएं और टीम प्रबंधन की योजनाएं भी अहम होती हैं।
मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार का भी जिक्र
जाफर ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार का नाम भी लिया। शमी ने भारत के लिए कई अहम मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है, लेकिन चोट और फिटनेस से जुड़ी चुनौतियों ने उनके करियर को प्रभावित किया। दूसरी ओर, भुवनेश्वर कुमार लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर रहे हैं। उनके अनुभव और गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता के बावजूद उन्हें नियमित अवसर नहीं मिले। जाफर के अनुसार, ऐसे खिलाड़ियों के मामले में चयन प्रक्रिया और टीम में वापसी की संभावनाओं को लेकर स्पष्टता जरूरी थी।
सरफराज और अभिमन्यु ईश्वरन को मौके मिलने पर बहस
इस सूची में सरफराज खान और अभिमन्यु ईश्वरन के नाम भी शामिल हैं। सरफराज ने घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाकर भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमित अवसर नहीं मिल पाए।
वहीं, बंगाल के बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम के चयन की दौड़ में रहे हैं। उन्हें कई बार टीम में चुना गया, लेकिन अब तक अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का अवसर नहीं मिला। ऐसे में उनके चयन और भविष्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
जाफर की सूची में सूर्यकुमार यादव का नाम भी शामिल है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कप्तानी और बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले सूर्यकुमार के भविष्य को लेकर भी चयन संबंधी फैसलों पर चर्चा हुई।
उपलब्धियों के साथ अधूरी रह गई कुछ खिलाड़ियों की उम्मीद
अगरकर का कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त हुआ। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने तीन आईसीसी खिताब जीते, जो चयन समिति के रिकॉर्ड की अहम उपलब्धियां हैं। दूसरी ओर, जाफर की टिप्पणी बताती है कि टीम की सफलता के बावजूद चयन प्रक्रिया के हर फैसले को सही नहीं माना जा सकता।
किसी खिलाड़ी को मौका नहीं मिलना अपने आप में उसका करियर खत्म होने का प्रमाण नहीं है। फिर भी, लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अवसर, चयन के मानदंड और भविष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। अगरकर के कार्यकाल का आकलन इसलिए दो पहलुओं से होगा—एक तरफ बड़ी ट्रॉफियां और दूसरी तरफ उन खिलाड़ियों के सवाल, जिन्हें अपेक्षित मौके नहीं मिल सके।


