सऊदी अरब की राजधानी रियाद में किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार को एक बार फिर हमला हुआ। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल हवाई अड्डे के टर्मिनल-4 से टकराया, जिससे वहां आग लग गई। इसके अलावा, हवाई अड्डे के आसपास एक क्रूज मिसाइल को भी एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया। लगातार दूसरे दिन हुए हमले से क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एक दिन पहले हमले में 12 लोगों की मौत
यह हमला शनिवार को हुए घातक हमले के ठीक एक दिन बाद हुआ है। सऊदी विमानन अधिकारियों के अनुसार, शनिवार के हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 309 लोग घायल हुए थे। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई। मृतकों में सऊदी नागरिकों के अलावा बांग्लादेश, अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, फलस्तीन, सीरिया और सूडान के नागरिक शामिल थे।
शनिवार की घटना के बाद हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन रोक दिया गया था। रविवार को हुए नए हमले के बाद भी हवाई अड्डा बंद रहा। अधिकारियों ने परिसर को हुए नुकसान का आकलन करने और सुरक्षा जांच पूरी करने की प्रक्रिया शुरू की।
मेट्रो के दो स्टेशनों पर सेवा निलंबित
हमले के बाद रियाद मेट्रो के हवाई अड्डे से जुड़े तीन स्टेशनों में से दो पर सेवा अस्थायी रूप से रोक दी गई। अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले की रोजाना समीक्षा की जाएगी। हवाई अड्डे के आसपास विस्फोट की आवाज सुनाई देने और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही की खबरें भी सामने आईं।
सऊदी अधिकारियों ने यात्रियों को हवाई अड्डे जाने से पहले अपनी एयरलाइन से उड़ानों की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी है। लगातार हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ रहा है।
हूतियों पर आरोप, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को हालिया हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हूतियों ने शनिवार के हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन रविवार को टर्मिनल-4 पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
हूतियों ने सऊदी हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली एयरलाइंस, कर्मचारियों और यात्रियों को चेतावनी भी दी है। दूसरी ओर, सऊदी गठबंधन ने हमलों का जवाब देने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सऊदी अरब के सैन्य अभियान में सीधे शामिल होने की संभावना पर विचार करने की बात कही है।
लगातार हमलों से यमन संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है। हवाई अड्डे जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर गंभीर असर पड़ सकता है।


