हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने अपनी दमदार आवाज, अभिनय और यादगार किरदारों से दर्शकों के दिलों पर राज किया है। ‘जंजीर’ के एंग्री यंग मैन से लेकर ‘पीकू’ के संवेदनशील पिता और ‘कल्कि 2898 एडी’ के अश्वत्थामा तक, बिग बी ने हर दौर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी उपलब्धियों में कई बड़े पुरस्कारों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान भी शामिल है।
‘जंजीर’ से शुरू हुई सुपरस्टार बनने की कहानी
अमिताभ बच्चन ने 1969 में फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन 1973 में रिलीज हुई ‘जंजीर’ ने उनके करियर को नई दिशा दी। इस फिल्म में उनका गंभीर और विद्रोही अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया। इसके बाद उन्हें हिंदी सिनेमा के ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में पहचान मिली।
‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘त्रिशूल’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। खास तौर पर 1978 का साल उनके करियर के सबसे शानदार वर्षों में गिना जाता है। इस दौरान उनकी ‘डॉन’, ‘त्रिशूल’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘कसमें वादे’ जैसी फिल्में रिलीज हुईं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी कई फिल्में सिनेमाघरों में लंबे समय तक चलती रहीं।
गिनीज रिकॉर्ड से जुड़ी अनोखी उपलब्धियां
अमिताभ बच्चन के करियर की सबसे दिलचस्प उपलब्धियों में फिल्म ‘पा’ भी शामिल है। इसमें उन्होंने अपने वास्तविक जीवन के बेटे अभिषेक बच्चन के पिता की जगह उनके बेटे की भूमिका निभाई थी। फिल्म में अमिताभ ने प्रोजेरिया से पीड़ित ऑरो नाम के बच्चे का किरदार निभाया, जिसके लिए उनके लुक और अभिनय की खूब सराहना हुई। इस अनोखी पिता-पुत्र की ऑनस्क्रीन जोड़ी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से जुड़ी रिपोर्टों में भी जगह मिली।
इसके अलावा, अमिताभ बच्चन ने 19 अन्य प्रसिद्ध शास्त्रीय और पार्श्व गायकों के साथ मिलकर ‘श्री हनुमान चालीसा’ के गायन में हिस्सा लिया था। इस सामूहिक प्रस्तुति को भी एक खास गिनीज रिकॉर्ड से जोड़ा गया।
मैडम तुसाद में जगह पाने वाले पहले भारतीय अभिनेता
बिग बी की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। लंदन के प्रसिद्ध मैडम तुसाद संग्रहालय में मोम की प्रतिमा के रूप में जगह पाने वाले वह पहले भारतीय अभिनेता बने। यह उपलब्धि भारतीय सिनेमा के लिए भी खास मानी गई। 1999 में बीबीसी के एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में उन्हें ‘एक्टर ऑफ द मिलेनियम’ चुना गया था। इस सम्मान के लिए उन्होंने चार्ली चैपलिन और मार्लन ब्रैंडो जैसे विश्वविख्यात कलाकारों को पीछे छोड़ा था।
चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित
अमिताभ बच्चन को उनके शानदार अभिनय के लिए चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। उन्हें ‘अग्निपथ’, ‘ब्लैक’, ‘पा’ और ‘पीकू’ के लिए यह सम्मान मिला। इन फिल्मों में उन्होंने एक-दूसरे से बिल्कुल अलग किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की।
आज भी अमिताभ बच्चन फिल्मों के साथ टेलीविजन पर सक्रिय हैं। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के जरिए उन्होंने दर्शकों की नई पीढ़ी के बीच भी अपनी खास जगह बनाई है। यही वजह है कि बिग बी का नाम सिर्फ सुपरहिट फिल्मों और पुरस्कारों तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक लंबे और प्रभावशाली सफर की पहचान बन चुका है।


