अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस कानून से अमेरिका को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है। भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में शामिल हैं, इसलिए दोनों पर इस प्रावधान का असर पड़ने की संभावना चर्चा में है। हालांकि, भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाया गया है।
18 सितंबर को ट्रंप ने किए हस्ताक्षर
व्हाइट हाउस के अनुसार ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को एचआर 5334 को कानून बनाया। इससे पहले अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने इसे मंजूरी दी थी। सीनेट में बिल 86-11 वोट से पारित हुआ था, जबकि प्रतिनिधि सभा ने 262-159 के मत से इसे मंजूरी दी। इसके बाद ट्रंप के हस्ताक्षर के साथ यह कानून बन गया।
कानून रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों के अलावा उसकी तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाता है। यह उन जहाजों और उनसे जुड़े विदेशी पक्षों पर कार्रवाई का रास्ता खोलता है, जिनका इस्तेमाल रूसी ऊर्जा कारोबार को जारी रखने या मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद के लिए किया जाता है।
भारत-चीन पर 100% टैरिफ कैसे लग सकता है?
कानून के तहत राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है, जो कानून लागू होने से पहले के 12 महीनों में कुल मात्रा के आधार पर रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदारों में रहे हों। भारत और चीन इसी वजह से संभावित दायरे में हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून टैरिफ को अपने आप लागू नहीं करता। ट्रंप को यह तय करना होगा कि किन देशों को निशाना बनाया जाए और कितनी दर लगाई जाए। कानून कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों और टैरिफ से छूट देने की गुंजाइश भी रखता है।
कब से लागू होगा कानून?
रिपोर्ट के मुताबिक कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर प्रभावी होगा। इसके बाद संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। गैस के मामले में कुछ शर्तों के साथ अपवाद भी रखा गया है। अगर किसी देश का रूसी गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम रहा हो और उसने रूसी गैस पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों, तो उसे गैस संबंधी शुल्क से छूट मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम है फैसला?
भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। नए अमेरिकी कानून से इसी ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है। भारत पहले ही संकेत दे चुका है कि रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए जाने वाले नए अमेरिकी टैरिफ भारत-अमेरिका व्यापार और आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए फिलहाल सबसे अहम सवाल 100 प्रतिशत टैरिफ लगना नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन इस नए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कब और किस तरह करता है, यह है।


