अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेजों ने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की आतंकवादी योजनाओं को लेकर बड़ा खुलासा किया है। इन दस्तावेजों के मुताबिक, 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों से कई साल पहले ही बिन लादेन की नजर भारत समेत कई देशों पर थी। अगस्त 1998 की एक खुफिया रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया था, जहां अलकायदा हमले की योजना बना सकता था।
70 से ज्यादा खुफिया दस्तावेज जारी
9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर CIA ने ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े 70 से अधिक राष्ट्रपति स्तरीय खुफिया ब्रीफ जारी किए हैं। करीब 100 पन्नों वाले इन दस्तावेजों में फरवरी 1998 से सितंबर 2001 तक की खुफिया जानकारी शामिल है। इनमें बिन लादेन की गतिविधियों, उसके नेटवर्क, फंडिंग और संभावित आतंकी हमलों को लेकर अमेरिकी अधिकारियों को दी गई चेतावनियों का विवरण मिलता है।
भारत के साथ कई और देश निशाने पर
1998 की रिपोर्ट में भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा का भी संभावित निशाने के तौर पर उल्लेख किया गया था। नाइजीरिया को भी संभावित लक्ष्य वाले देशों में शामिल किया गया था। हालांकि, दस्तावेज में भारत के भीतर किसी खास शहर, संस्थान या स्थान को निशाना बनाए जाने की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इसे भारत में किसी विशेष हमले की ठोस योजना के बजाय बिन लादेन की व्यापक वैश्विक आतंकी मंशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिका को भी लगातार मिल रही थी चेतावनी
CIA की रिपोर्टों से यह भी सामने आया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से बिन लादेन के खतरे को लेकर चिंतित थीं। 1998 से 2001 के बीच राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और बाद में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को लगातार ब्रीफिंग दी गई। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका की धरती पर हमले की आशंका जताई गई थी। सितंबर 1998 की एक रिपोर्ट में बिन लादेन की अमेरिका के भीतर हमला करने की प्राथमिकता का जिक्र था। इसी दौरान खुफिया अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि अलकायदा विस्फोटकों से भरे विमान का इस्तेमाल किसी अमेरिकी शहर के खिलाफ कर सकता है।
हवाई जहाज हाईजैक की भी थी आशंका
दिसंबर 1998 की एक अन्य ब्रीफिंग में बिन लादेन के नेटवर्क के कुछ सदस्यों को हाईजैकिंग की ट्रेनिंग मिलने की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट में अमेरिकी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं दर्ज थीं। बाद के वर्षों में चेतावनियों की गंभीरता बढ़ती गई और अगस्त 2001 की मशहूर ब्रीफिंग में साफ तौर पर कहा गया था कि बिन लादेन अमेरिका में हमला करने के लिए दृढ़ है।
हालांकि, इन दस्तावेजों का मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी सरकार को 9/11 हमले की तारीख, स्थान और पूरी साजिश की पहले से जानकारी थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों के पास खतरे से जुड़े कई अलग-अलग संकेत थे, लेकिन उन्हें समय रहते एक स्पष्ट तस्वीर में नहीं जोड़ा जा सका। नए दस्तावेज इसी खुफिया विफलता और उस दौर में मौजूद चेतावनियों पर फिर से सवाल खड़े करते हैं।


