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    BRICS : पश्चिम एशिया में संघर्ष का मुद्दा उठा, PM मोदी बोले-तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर

    नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक तनाव, सप्लाई चेन और बदलते भू-राजनीतिक हालात को लेकर अहम संदेश दिया। भारत मंडपम में आयोजित सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तस्वीर भी सामने आई। तीनों नेताओं की यह तस्वीर ऐसे समय आई है, जब दुनिया में पश्चिम एशिया संघर्ष समेत कई बड़े भू-राजनीतिक संकट चल रहे हैं।

    ग्रुप फोटो में साथ दिखे मोदी, जिनपिंग और पुतिन

    ब्रिक्स नेताओं की सामूहिक तस्वीर में प्रधानमंत्री मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन एक साथ नजर आए। यह तस्वीर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक सक्रियता और ब्रिक्स के भीतर प्रमुख शक्तियों के बीच संवाद का प्रतीक मानी जा रही है। मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात पिछले तीन वर्षों में तीसरी बार एक साथ होने के रूप में भी देखी जा रही है।

    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए हैं। सम्मेलन से इतर मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंधों, सीमा पर शांति और आपसी सहयोग पर चर्चा हुई।

    ‘कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं’

    ओपन सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया लगातार बढ़ते तनाव का सामना कर रही है। युद्ध, महामारी, जलवायु आपदाएं और सप्लाई चेन में रुकावटें अब किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहतीं। इनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

    पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे किसी भी संकट का प्रभाव कम किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन की जरूरत पर जोर दिया। महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक तक पहुंच को लेकर भी उन्होंने किसी भी तरह के एकतरफा नियंत्रण या उनके ‘हथियारीकरण’ से बचने की बात कही।

    चार प्राथमिकताओं पर भारत का जोर

    प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के लिए भारत की चार प्रमुख प्राथमिकताओं—रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता—पर जोर दिया। उन्होंने संकटों की पहले पहचान और उनसे निपटने की क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई। इसी क्रम में ब्रिक्स देशों ने संक्रामक बीमारियों के लिए एकीकृत अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित करने पर सहमति जताई है। आपदा प्रबंधन से जुड़े डेटा के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में भी कदम उठाने की बात सामने आई है।

    पश्चिम एशिया संकट भी चर्चा के केंद्र में

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। संयुक्त घोषणा में क्षेत्र में संयम बरतने और वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ब्रिक्स से पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने में भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    इस तरह नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक तनाव, ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा, सप्लाई चेन तथा बहुपक्षीय व्यवस्था के भविष्य पर भी केंद्रित दिखाई दिया। भारत ने इस मंच के जरिए संकटों के बीच सहयोग और लचीली वैश्विक अर्थव्यवस्था का संदेश देने की कोशिश की है।

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