उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राजधानी लखनऊ में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और रणनीतिकारों के बीच हुई मैराथन बैठकों के बाद चुनावी पिच की दिशा तय कर ली गई है। भाजपा आगामी चुनाव में “अखिलेश से बेहतर योगी” के नैरेटिव और नारे पर बड़ा दांव लगाने जा रही है।
मैराथन बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की मौजूदगी में लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय में घंटों चली उच्चस्तरीय बैठकों में 2027 के चुनाव की रूपरेखा पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे। बैठक में पिछले चुनावों के आंकड़ों, हालिया जनसांख्यिकीय बदलावों और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले का तोड़ निकालने पर चर्चा की गई। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के कार्यकाल (2012-2017) और योगी आदित्यनाथ की मौजूदा सरकार के बीच का सीधा तुलनात्मक आकलन ही पार्टी के लिए सबसे बड़ा हथियार बनेगा।
‘अखिलेश से बेहतर योगी’ नारे के मुख्य आधार
भाजपा संगठन इस नारे के जरिए राज्य के मतदाताओं के सामने दोनों सरकारों के प्रदर्शन का स्पष्ट अंतर प्रस्तुत करने की योजना बना रहा है: पार्टी का मुख्य फोकस कानून-व्यवस्था पर रहेगा। भाजपा जनता को याद दिलाएगी कि 2017 से पहले राज्य में किस तरह का भय का माहौल और माफिया राज था, जिसे योगी सरकार ने कड़ाई से खत्म कर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की। योगी आदित्यनाथ के ट्रैक रिकॉर्ड (एक्सप्रेसवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश) की तुलना अखिलेश यादव के समय के कथित जातिगत और परिवारवादी शासन मॉडल से की जाएगी।
- भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन: सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता, बिना पर्ची-बिना खर्ची की भर्ती प्रक्रिया और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभार्थियों के खाते में पहुंचना पार्टी का अहम बिंदु होगा।
सपा के नैरेटिव की काट
समाजवादी पार्टी लगातार पीडीए और जातीय जनगणना के मुद्दे पर सरकार को घेर रही है। भाजपा का रणनीतिक मानना है कि व्यक्तिगत छवि और प्रशासनिक दक्षता की तुलना में योगी आदित्यनाथ की छवि अखिलेश यादव पर भारी पड़ती है। ‘अखिलेश से बेहतर योगी’ के संदेश को बूथ स्तर तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया, जनसभाओं और घर-घर संपर्क अभियानों का विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है। पार्टी कैडर को निर्देश दिए गए हैं कि वे 2017 से पहले की स्थिति और वर्तमान की स्थिति का तुलनात्मक रिपोर्ट कार्ड हर मतदाता तक पहुंचाएं, ताकि जनता 2027 में विकास और सुशासन के नाम पर मतदान करे।


