ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल और गैस की कीमतों को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी और अमेरिका में पेट्रोल की कीमत अंततः दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। वहीं, ईरान ने अपनी ऊर्जा सुविधाओं पर किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिका को गंभीर जवाब देने की चेतावनी दी है। इस बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मौजूदा संकट के लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जीत के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी पेट्रोल की कीमत पहले करीब तीन डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और बाद में यह दो डॉलर से भी नीचे चली जाएगी। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
हालांकि, मौजूदा बाजार स्थिति ट्रंप के दावे से अलग तस्वीर दिखा रही है। रॉयटर्स के मुताबिक 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 97.34 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई करीब 92.63 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। मध्य पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचने की आशंका और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति को लेकर चिंता ने तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका को ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस ढांचा काफी फैला हुआ है और उस पर हमला करना आसान नहीं होगा। उनका कहना है कि अगर ईरान की संपत्तियों को निशाना बनाया गया तो अमेरिका को भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने दूसरी ओर चेतावनी दी है कि अमेरिकी जहाजों पर हमला होने की स्थिति में ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी कुछ ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर कार्रवाई का वीडियो जारी किया है।
एर्दोगन ने इस्राइल पर साधा निशाना
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस्राइल पर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाने और अमेरिका-ईरान के बीच शांति प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल की कार्रवाई के कारण जून में हुआ 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता पटरी से उतर गया।
एर्दोगन के मुताबिक इस संघर्ष की कीमत सिर्फ ईरान या खाड़ी देशों को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सैन्य टकराव की नीति बदलने की जरूरत बताई।
नेतन्याहू का रुख भी सख्त
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरानी शासन कमजोर पड़ चुका है और उसके अस्तित्व पर संकट है। उन्होंने ईरानी सरकार के अंत को अपने प्रमुख लक्ष्यों में शामिल बताया और कहा कि इस्राइल अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने के लिए तैयार है।
इस तरह एक तरफ ट्रंप युद्ध खत्म होने के बाद ऊर्जा कीमतों में भारी गिरावट का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान की धमकियों और होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार फिलहाल अनिश्चितता से जूझ रहा है।


