झारखंड की राजनीति में एक ऐसा दुखद संयोग सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों को झकझोर दिया है। करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान राज्य के शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले तीन मंत्रियों का असमय निधन हो चुका है। इन तीनों की मौत की परिस्थितियां अलग-अलग थीं—पहले लंबी बीमारी, फिर एक गंभीर हादसा और अब अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध या किसी खतरे की पुष्टि नहीं हुई है।
जगरनाथ महतो से शुरू हुई दुखद कड़ी
इस सिलसिले में पहला नाम जगरनाथ महतो का है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और डुमरी से विधायक रहे महतो राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था और नवंबर 2020 में उनका फेफड़ा प्रत्यारोपण भी हुआ था। इसके बाद भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहीं।
अप्रैल 2023 में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें चेन्नई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 6 अप्रैल 2023 को उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 56 वर्ष थी।
महतो के निधन के बाद शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सरकार में दूसरे नेता को सौंपी गई और झारखंड की राजनीति को एक बड़ा झटका लगा।
रामदास सोरेन की मौत ने फिर चौंकाया
इसके करीब दो साल बाद शिक्षा विभाग से जुड़ा एक और दुखद घटनाक्रम सामने आया। रामदास सोरेन को राज्य में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। अगस्त 2025 में उनके साथ उनके जमशेदपुर स्थित आवास पर हादसा हुआ।
2 अगस्त 2025 को वह बाथरूम में गिर गए थे। हादसे में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं और उनके मस्तिष्क में खून का थक्का बनने की जानकारी सामने आई। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया, जहां अपोलो अस्पताल में उनका इलाज चला। लेकिन 15 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
अब सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन
अब इस दुखद कड़ी में तीसरा नाम सुदिव्य कुमार सोनू का जुड़ गया है। गिरिडीह से झामुमो विधायक और राज्य सरकार में मंत्री सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
6 सितंबर 2026 को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। शुरुआती रिपोर्टों में कार्डियक अरेस्ट/हार्ट अटैक को मौत की वजह बताया गया है। वह 56 वर्ष के थे।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार और झामुमो को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उनके निधन पर राज्य में शोक की लहर है।
क्या तीनों घटनाओं में कोई संबंध है?
लगातार तीन शिक्षा मंत्रियों की मौत ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है। लेकिन इन घटनाओं को किसी एक कारण से जोड़ने के लिए फिलहाल कोई प्रमाण सामने नहीं है। जगरनाथ महतो लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे, रामदास सोरेन की मौत गंभीर गिरने के हादसे और उसके बाद बिगड़ी स्थिति से हुई, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू का निधन अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद हुआ।
इसलिए इसे फिलहाल महज एक दुखद संयोग के तौर पर ही देखा जा रहा है। हालांकि, साढ़े तीन साल के भीतर शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का असमय चले जाना झारखंड की राजनीति के इतिहास में निश्चित रूप से एक असाधारण और बेहद पीड़ादायक घटनाक्रम बन गया है।


