कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम और आंदोलन को लेकर अब एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। अहमदाबाद के रहने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार, 3 सितंबर को ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) लॉन्च करने का ऐलान किया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि यह नया गुट मूल सीजेपी से अलग हुए लोगों और उन वॉलंटियर्स का मंच है, जो संगठन के मौजूदा संचालन से असहमत हैं।
क्यों बनाई गई CJP-D?
मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि जिस आंदोलन में देशभर के युवाओं और छात्रों ने हिस्सा लिया, उसकी सफलता के बाद संगठन को लोकतांत्रिक तरीके से आगे नहीं बढ़ाया गया। उनका कहना है कि सीजेपी की टीम बनाने में आंदोलन से जुड़े वॉलंटियर्स से पर्याप्त सलाह नहीं ली गई।
ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, उन्होंने उम्मीद की थी कि संगठन में हर राज्य से प्रतिनिधित्व होगा और महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक रूप से लिए जाएंगे। उनका आरोप है कि इसके बजाय सीमित लोगों की टीम तैयार कर दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि टीम में आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को जगह दी गई है।
केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप
CJP-D लॉन्च करते हुए ब्रह्मभट्ट ने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की ऊर्जा को अब ‘टीम केजरीवाल’ की दिशा में मोड़ा जा रहा है। उनका दावा है कि आंदोलन मूल रूप से छात्रों और आम लोगों का था, लेकिन बाद में कुछ राजनीतिक लोगों का प्रभाव बढ़ गया।
उन्होंने सीजेपी के नेतृत्व पर आरोप लगाया कि आंदोलन के बाद संगठनात्मक फैसलों में जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी कम हो गई। हालांकि, ये आरोप ब्रह्मभट्ट के दावे हैं और इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सभी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है CJP का पूरा विवाद?
कॉकरोच जनता पार्टी हाल के छात्र आंदोलनों के बाद चर्चा में आई थी। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किया। सीजेपी ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दल के बजाय जनता के दबाव वाले आंदोलन के रूप में पेश किया है। संगठन ने शिक्षा, रोजगार और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी अभियान की भी बात कही थी।
हाल ही में सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च भी वापस ले लिया था। यह फैसला केंद्र और कुछ राज्य सरकारों की ओर से प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया।
CJP-D का मकसद क्या?
मनीष ब्रह्मभट्ट का कहना है कि नई CJP-D में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेने पर जोर होगा। वह चाहते हैं कि संगठन का नेतृत्व कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहे और आंदोलन से जुड़े वॉलंटियर्स को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भूमिका मिले।
CJP-D ने जल्द ही वॉलंटियर रैली आयोजित करने की बात भी कही है। ऐसे में अब देखना होगा कि यह नया गुट कितना समर्थन जुटा पाता है और क्या सीजेपी के भीतर चल रही असहमति आगे चलकर बड़े संगठनात्मक विभाजन का रूप लेती है।


