कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या के मामले में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चेयरमैन यासीन मलिक ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में बड़ा दावा किया है। मलिक ने मामले में अपनी भूमिका से पूरी तरह इनकार किया है। साथ ही उसने आगे की कानूनी कार्यवाही में बचाव नहीं करने और अपने लिए मौत की सजा की मांग करने की बात कही है। इसी हलफनामे में उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल मलिक से तलाक लेने का फैसला भी बताया है। एक दौर में कश्मीर घाटी के अलगाववादी आंदोलन में उसका खासा प्रभाव और दबदबा था। 1988 के बाद वह JKLF के प्रमुख चेहरों में उभरा और 1990 के आसपास संगठन घाटी के उग्रवाद के प्रमुख केंद्रों में था।
कश्मीर में यासीन मलिक की बोलती थी तूती
एक दौर था जब जम्मू-कश्मीर की राजनीति और अलगाववादी गतिविधियों में यासीन मलिक का नाम मुख्यधारा में गूंजता था। ‘जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ (JKLF) के प्रमुख के रूप में 1980 के दशक के उत्तरार्ध और 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में उसकी तूती बोलती थी। घाटी के अलगाववादी आंदोलन में उसकी केंद्रीय भूमिका थी और वह युवाओं को गुमराह कर हिंसक राह पर धकेलने का प्रमुख चेहरा बना।
मलिक पर 1989 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण और 1990 में वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या समेत कई गंभीर आतंकी वारदातों में शामिल होने के आरोप लगे। वर्षों तक अलगाववादी राजनीति के जरिए घाटी के माहौल को प्रभावित करने वाले मलिक को कानून का कड़ा सामना करना पड़ा।
वर्ष 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार द्वारा अलगाववादियों पर किए गए कड़े प्रहार के तहत JKLF पर प्रतिबंध लगा दिया गया। मई 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने यासीन मलिक को टेरर फंडिंग (आतंकी गतिविधियों के लिए वित्तपोषण) और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामलों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वर्तमान में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहा है।
25 पन्नों के हलफनामे में क्या कहा?
यासीन मलिक ने बुधवार को श्रीनगर की अदालत में 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल किया। टाडा और पोटा मामलों की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष दाखिल इस दस्तावेज में उसने कहा कि सरला भट्ट की हत्या में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। मलिक का दावा है कि 19 अप्रैल 1990 को जब सरला भट्ट की हत्या हुई, उस समय वह खुद गंभीर रूप से घायल था और बेहोशी की हालत में उसका इलाज चल रहा था।
मलिक ने उस आरोप को भी खारिज किया है कि उसने बदला लेने के लिए सरला भट्ट की हत्या का आदेश दिया था। उसका कहना है कि घटना के तीन दशक से अधिक समय बाद उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसने यह भी कहा कि जून 2026 में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की चार्जशीट में अपना नाम आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने से उसे हैरानी हुई।
‘मुकदमा नहीं लड़ूंगा, मुझे मौत की सजा दें’
हलफनामे में मलिक ने कहा है कि वह आगे की मुकदमे की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहता और अपने लिए मौत की सजा की मांग करता है। हालांकि, उसका यह बयान अपने आप में अदालत की ओर से मौत की सजा दिए जाने का फैसला नहीं है। सरला भट्ट मामले में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और अदालत में आगे की सुनवाई होनी है। मामले में जवाब दाखिल करने के लिए 19 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है।
पत्नी मुशाल से तलाक क्यों चाहता है?
यासीन मलिक ने हलफनामे में अपनी पत्नी मुशाल मलिक से तलाक लेने की इच्छा भी जताई है। उसने कहा कि वह नहीं चाहता कि उसकी पत्नी उसकी मौजूदा परिस्थितियों का बोझ पूरी जिंदगी उठाती रहे या उसकी मृत्यु के बाद विधवा के रूप में जीवन बिताए।
मलिक के मुताबिक, इसी वजह से उसने मुशाल से अलग होने का फैसला किया है। वह चाहता है कि उसकी पत्नी सम्मान और उम्मीद के साथ अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करे।
1990 का सरला भट्ट हत्याकांड
सरला भट्ट श्रीनगर के एसकेआईएमएस अस्पताल में नर्स थीं। 1990 में आतंकियों ने उनका अपहरण किया था और बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। करीब 35 साल बाद जून 2026 में SIA ने इस मामले में 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें यासीन मलिक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।
यासीन मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। वह पहले से ही आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अब सरला भट्ट हत्याकांड में उसके नए हलफनामे और मौत की सजा की मांग ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।


