नेपाल में भारी प्राकृतिक आपदा और जलप्रलय के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। इस आपदा के बीच नेपाल की संसद में चीन की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल उठाया गया है। नेपाल की राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) से प्रतिनिधि सभा के सदस्य और सांसद ताहीर अली भाट ने आरोप लगाया है कि यदि चीन ने समय रहते नेपाल को पूर्व चेतावनी और सूचनाएं दी होतीं, तो सैकड़ों लोगों की जानें बचाई जा सकती थीं।
चीन पर लापरवाही का आरोप
सांसद ताहीर अली भाट के अनुसार, जलप्रलय से पूर्व चीन की ओर से सूचना और चेतावनी तंत्र (Warning System) में बड़ी चूक हुई है। उन्होंने कहा कि चीन की ओर से समय पर जानकारी न मिलने के कारण नुकसान का दायरा इतना व्यापक हो गया। इस मुद्दे को नेपाल की संसद में प्रमुखता से उठाया जाएगा, जहाँ हाल ही में जलप्रलय और उसके कारणों पर करीब तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई है।
नेपाल में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 5,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। सांसद ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में हताहतों और लापता लोगों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
भारत की त्वरित और व्यापक राहत सहायता
नेपाल के इस संकट काल में भारत ने बड़े पैमाने पर मदद का हाथ बढ़ाया है। सांसद ताहीर अली भाट ने संकट की इस घड़ी में भारत द्वारा भेजी गई त्वरित सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया।
- भारत की ओर से नेपाल को लगभग 40 मीट्रिक टन राहत सामग्री भेजी गई है, जिसमें सूखा राशन, दवाएं, टेंट और अन्य आवश्यक सामग्रियां शामिल हैं।
- इससे पहले भी भारत की तरफ से 10 मीट्रिक टन सहायता सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी थी।
चीन ने भी सहायता का एलान किया है, लेकिन समय पर चेतावनी न देने की वजह से नेपाल के भीतर असंतोष का माहौल है।
आपदा में राहत वितरण और स्थानीय स्थिति
सांसद ने जोर देकर कहा कि इस समय पूरा देश पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर आपदा का सामना कर रहा है। विदेश और देश से आ रही राहत सामग्री का निष्पक्ष और पारदर्शी वितरण बेहद जरूरी है, ताकि सहायता सीधे वास्तविक पीड़ितों तक पहुंचे।
अपने संसदीय क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रोहिणी पालिका के 15 लोग रसुवागढ़ी क्षेत्र में फंस गए थे, जिन्हें सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। हालांकि, नेपाली सेना के राहुल गर्गी और प्रहरी जवान संदीप अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। नेपाल अब भविष्य में ऐसी त्रासदियों से निपटने के लिए ठोस पूर्व-चेतावनी रणनीति बनाने की तैयारी में है।


