कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर नेपाल और भारत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और त्रासदी पर दिए गए एक कथित बयान को लेकर सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गए हैं। नेपाल और तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने व अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) के कारण 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों भारतीय नागरिक लापता हैं। इस गंभीर आपदा के बीच शशि थरूर द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द ‘ड्रामा’ (Drama) को लेकर देश भर में आक्रोश फैल गया है और यूजर्स उनकी जमकर क्लास लगा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल बाढ़ से उपजी तबाही और उस पर हो रही अंतरराष्ट्रीय मीडिया व राजनीतिक बयानबाजी पर टिप्पणी करते हुए शशि थरूर ने एक पोस्ट या बयान में परिस्थिति के लिए ‘ड्रामा’ शब्द का इस्तेमाल किया।
यद्यपि माना जा रहा है कि उनके बयान का इरादा राजनीतिक या कूटनीतिक मीडिया कवरेज पर तंज कसना था, लेकिन भीषण मानवीय क्षति के बीच इस शब्द के प्रयोग ने आग में घी डालने का काम किया।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा: “इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं?”
शशि थरूर के इस बयान के सामने आते ही एक्स (पहले ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नेटिजन्स और राजनीतिक प्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा:
- असंवेदनशीलता का आरोप: लोगों ने सवाल उठाया कि जहां सैकड़ों परिवार अपनों को खो चुके हैं और सैकड़ों भारतीय तीर्थयात्री लापता हैं, वहां ऐसे शब्दों का इस्तेमाल एक जिम्मेदार सांसद को शोभा नहीं देता।
- सोशल मीडिया ट्रॉलिंग: कई यूजर्स ने लिखा— “अंग्रेजी के भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करने वाले थरूर इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं? यह कोई ड्रामा नहीं, बल्कि सैकड़ों मासूमों की जिंदगी और मौत से जुड़ी त्रासदी है।”
- माफी की मांग: आम नागरिकों से लेकर विभिन्न संगठनों ने शशि थरूर से तुरंत अपना बयान वापस लेने और पीड़ित परिवारों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।
राजनीतिक गलियारों में भी पलटवार
थरूर के इस बयान पर विरोधी राजनीतिक दलों ने भी तीखा हमला बोला है। भाजपा और सत्ताधारी नेताओं ने कहा कि जब भारत सरकार NDRF और सेना की मदद से राहत-बचाव अभियानों में जुटी है, तब कांग्रेस नेता इस दुखद मानवीय त्रासदी का मजाक उड़ा रहे हैं। फिलहाल विवाद बढ़ता देख शशि थरूर या उनकी टीम की ओर से बयान के संदर्भ पर सफाई और स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।


