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    मनुस्मृति के श्लोकों पर राहुल गांधी का कटाक्ष, अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-माफी मांगें नहीं तो होगा बहिष्कार

    ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘मनुस्मृति’ पर दिए गए बयान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने राहुल गांधी को अपनी हिंदू विरोधी मानसिकता और भ्रामक प्रचार छोड़ने की सख्त चेतावनी देते हुए माफी न मांगने पर सनातन समाज की ओर से तीव्र विरोध और बहिष्कार का सामना करने की बात कही है।

    विवाद का मुख्य कारण

    महाराष्ट्र के पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति के श्लोकों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया था कि यह ग्रंथ महिलाओं को पुरुषों के अधीन रखने और पिंजरे में बंद रखने की मानसिकता को बढ़ावा देता है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया था।

    शंकराचार्य का पलटवार और तर्क

    • श्लोक का सही अर्थ: शंकराचार्य ने कहा कि राहुल गांधी ने जिस श्लोक (‘पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने…’) का उल्लेख किया, वह महिलाओं के नियंत्रण या अधीनता का नहीं, बल्कि परिवार और समाज द्वारा उनके संरक्षण और सम्मान के दायित्व का विधान है।
    • ‘रक्षति’ का व्याकरण: संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से ‘रक्षति’ का अर्थ रक्षा और सुरक्षा देना है, किसी पर अधिकार या नियंत्रण जमाना नहीं।
    • सनातन में नारी स्थान: सनातन परंपरा में गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी महान ऋषिकाओं का उदाहरण देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हमारी संस्कृति ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ के सिद्धांत पर आधारित है।
    • संविधान बनाम मनुस्मृति: राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा को मनुस्मृति से जोड़ने को उन्होंने निराधार बताया और स्पष्ट किया कि स्वतंत्र भारत का शासन केवल भारत के संविधान से चलता है।

    ‘धर्म से बहिष्कृत’ और अल्टीमेटम

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने याद दिलाया कि संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक सनातन ग्रंथों पर बार-बार गलत और भ्रामक टिप्पणी करने के कारण उन्हें पूर्व में ही ‘हिंदू धर्म से बहिष्कृत’ घोषित किया जा चुका है।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिना शास्त्रीय अध्ययन के ग्रंथों का अपमान बंद नहीं करते और माफी नहीं मांगते, तो प्रबुद्ध सनातन प्रेमी समाज उनका मुखर विरोध और वैचारिक बहिष्कार जारी रखेगा।

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