नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। नेपाल पुलिस और अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 160 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र बलों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियानों के दौरान शवों को बरामद किया जा रहा है। नेपाल प्रशासन के अनुसार, लगभग 750 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में स्थानीय निवासियों के अलावा 44 नेपाली सुरक्षाकर्मी और सैकड़ों पर्यटक शामिल हैं। सीमा के चीनी (तिब्बत) हिस्से में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 265 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीन के ग्यिरोंग पोर्ट (Gyirong Port) क्षेत्र में बिजली, नेटवर्क और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
भारतीय पर्यटकों और नागरिकों की स्थिति
इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से कई विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल और सीमावर्ती इलाकों से 130 से 140 से अधिक भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। लापता भारतीयों में से कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु हैं। पश्चिम बंगाल के 32 सदस्यों का एक दल और ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 श्रद्धालु रसुवागढ़ी/तिब्बत आव्रजन केंद्र के पास बाढ़ के बाद से संपर्क से बाहर हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सहायता और जानकारी जुटाने के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- +977-9851316807
- +977-9709107500
बाढ़ का कारण और तबाही का मंजर
वैज्ञानिकों और मौसम विभाग के अनुसार, बाढ़ के वक्त क्षेत्र में कोई मूसलाधार बारिश नहीं दर्ज की गई थी। तिब्बत क्षेत्र में 4.4 से 5.2 की तीव्रता वाले भूकंपीय झटकों की रिपोर्ट आई। आशंका जताई जा रही है कि झटकों के कारण ऊपरी ग्लेशियर झील (Glacial Lake Outburst Flood) फटी या हिमस्खलन हुआ, जिससे ल्हेन्डे नदी का रास्ता रुक गया और अचानक लाखों लीटर पानी तेजी से नीचे आ गया।
- पानी और कीचड़ के तेज बहाव में लगभग 19 से अधिक पुल पूरी तरह बह गए हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों को जोड़ने वाली 40 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कें पानी में समा गई हैं। इसके अलावा कम से कम 9 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं।
राहत और बचाव अभियान
नेपाली सेना ने स्थिति से निपटने के लिए लगभग 12-14 हेलीकॉप्टरों को बचाव अभियान और मेडिकल टीमों के साथ तैनात किया है। भारत के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने नेपाल सरकार के साथ शोक संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मानवीय सहायता और राहत सामग्री की पहली खेप का आश्वासन दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।


