पाकिस्तान ने भारत के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक तुर्की निर्मित अत्याधुनिक बायरकतार-TB2 ड्रोन तैनात किए हैं। इन ड्रोनों की तैनाती के बाद सीमा पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनका इस्तेमाल भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखने, संवेदनशील सैन्य ठिकानों की निगरानी करने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जा रहा है। भारतीय सेना भी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
बायरकतार-TB2 को दुनिया के सबसे चर्चित सैन्य ड्रोनों में गिना जाता है। यह मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने वाला मानव रहित विमान है, जिसका इस्तेमाल निगरानी, टोही और जरूरत पड़ने पर सटीक हमलों के लिए किया जा सकता है। अजरबैजान, लीबिया और यूक्रेन जैसे संघर्ष क्षेत्रों में इस ड्रोन की भूमिका के कारण इसे खास पहचान मिली है। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी सैन्य ठिकानों और उपकरणों के खिलाफ इसके इस्तेमाल के चलते इसे मीडिया में कभी-कभी “रूस किलर” भी कहा गया।
LoC पर इस तरह के उन्नत ड्रोन की तैनाती भारत के लिए नई सुरक्षा चुनौती मानी जा रही है। आधुनिक ड्रोन लंबे समय तक हवा में रहकर तस्वीरें, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा जुटा सकते हैं। इससे सीमा पर सैनिकों की तैनाती, सैन्य गतिविधियों और संवेदनशील ठिकानों की जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, ऐसी क्षमताओं का वास्तविक प्रभाव इलाके, मौसम, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और विरोधी पक्ष की वायु रक्षा व्यवस्था पर भी निर्भर करता है।
भारतीय सेना पहले से ही पाकिस्तान की ओर से होने वाली ड्रोन गतिविधियों को लेकर सतर्क रही है। जुलाई 2026 में जम्मू के खौर सेक्टर में भारतीय सेना ने एक संदिग्ध पाकिस्तानी निगरानी ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी थी। उस घटना ने LoC के पास ड्रोन आधारित निगरानी और घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया था।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया में ड्रोन अब केवल निगरानी का साधन नहीं रह गए हैं। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर मानव रहित प्रणालियों का इस्तेमाल किया था। इससे साफ हुआ कि भविष्य के सीमित संघर्षों में ड्रोन निगरानी, लक्ष्य पहचान, वायु रक्षा की जांच और रणनीतिक दबाव बनाने का अहम हथियार बन सकते हैं।
तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग ने भी भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं। पाकिस्तान ने अपनी ड्रोन क्षमता को तुर्की और अन्य देशों के सहयोग से मजबूत किया है। बायरकतार-TB2 जैसे प्लेटफॉर्म पाकिस्तान को लंबी दूरी की निगरानी और सटीक लक्ष्य पहचान की अतिरिक्त क्षमता दे सकते हैं।
फिलहाल भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियां LoC की गतिविधियों पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं। ड्रोन की बढ़ती भूमिका के बीच भारत के लिए चुनौती केवल हवाई घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और काउंटर-ड्रोन क्षमता को लगातार मजबूत बनाए रखना भी है। LoC पर बायरकतार-TB2 की तैनाती क्षेत्र में तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा तनाव के नए दौर का संकेत मानी जा रही है।


