संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने यानी सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को पूछा कि आखिर सरकार किस तैयारी में जुटी है और क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को विशेष सत्र में पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। जयराम रमेश के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में सदन के अनिश्चितकालीन स्थगन और सत्रावसान के बीच आमतौर पर दो से चार दिन का अंतर रहता है। उन्होंने कहा कि इस बार 10 दिन बीतने के बाद भी सत्रावसान को लेकर कोई औपचारिक जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, रमेश ने यह भी स्वीकार किया कि पहले ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब यह अंतर काफी लंबा रहा। 2015 के मानसून सत्र में यह अंतर 28 दिन और 2021 में 20 दिन का था। लेकिन कांग्रेस का तर्क है कि मौजूदा परिस्थितियां अलग हैं, क्योंकि परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़ी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इसी आधार पर पार्टी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
जयराम रमेश ने संसद की प्रक्रिया से जुड़ी पुस्तक प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर ऑफ पार्लियामेंट का हवाला देते हुए सत्रावसान की संवैधानिक प्रक्रिया भी बताई। अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति के आदेश से सदन का सत्रावसान होता है और इस संबंध में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करते हैं। आमतौर पर अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
कांग्रेस ने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख भी दोहराया है। पार्टी चाहती है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा आवंटन अगले 25 वर्षों तक बरकरार रहे। साथ ही कांग्रेस ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है।
इससे पहले परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। कांग्रेस अब सत्रावसान में देरी को इसी राजनीतिक गणित से जोड़कर देख रही है। वहीं, सरकार की ओर से इस देरी को लेकर तत्काल कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।


