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    बांग्लादेश में गहराया गंभीर GAS-बिजली संकट, ठप पड़ीं फैक्ट्रियां, जनता में हाहाकार, संकट में अर्थव्यवस्था

    बांग्लादेश में प्राकृतिक गैस और एलएनजी (LNG) की भारी किल्लत के कारण एक बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। गैस की आपूर्ति ठप्प होने से देश का औद्योगिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे कपड़ा (Textile), उर्वरक (Fertilizer), और स्टील समेत कई बड़े उद्योगों पर ताले लटक गए हैं या उत्पादन में भारी गिरावट आई है। बांग्लादेश की राष्ट्रीय ग्रिड में गैस की दैनिक आपूर्ति में 1.77 बिलियन क्यूबिक फीट (bcf) से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

    • टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कपड़ा निर्यातक देश बांग्लादेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे गाजीपुर, नारायणगंज, सावर) में गैस का दबाव शून्य के करीब पहुंच गया है। दर्जनों डाइंग और टेक्सटाइल मिलें बंद हो चुकी हैं तथा मुख्य कपड़ा कारखानों में उत्पादन क्षमता घटकर 30% से 50% रह गई है।
    • उर्वरक व खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां: गैस की कमी के कारण देश के कई बड़े सरकारी खाद कारखाने (जैसे आशुगंज फर्टिलाइजर) पूरी तरह बंद पड़े हैं। इसके साथ ही मेघना ग्रुप (MGI) और टीकी ग्रुप की खाद्य तेल, आटा, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुओं को प्रोसेस करने वाली दर्जनों फैक्ट्रियां बंद होने से आपूर्ति शृंखला पर संकट गहरा गया है।

    बिजली कटौती और आम जनता का हाहाकार

    बिजली संयंत्रों को पर्याप्त गैस न मिलने के कारण देश भर में कई-कई घंटों की बिजली कटौती (Power Cut) हो रही है। घरों में पाइप्ड कुकिंग गैस न मिलने से लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी के चूल्हों और महंगे सिलेंडरों का सहारा लेना पड़ रहा है। सीएनजी स्टेशनों पर ईंधन की कमी से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    संकट की मुख्य वजहें

    1. एलएनजी (LNG) टर्मिनलों में तकनीकी खराबी: महेशखाली में फ्लोटिंग एलएनजी टर्मिनल (FSRU) में आग लगने और तकनीकी खराबी के चलते एलएनजी की आपूर्ति आधी से भी कम रह गई है।
    2. भू-राजनीतिक तनाव व आयात में अड़चन: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और समुद्री रास्तों में व्यवधान के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
    3. घरेलू भंडारों की कमी: पुराने गैस कुओं में घटते उत्पादन और नए कुओं की खोज में देरी के चलते आयातित एलएनजी पर देश की निर्भरता अत्यधिक बढ़ चुकी थी।

    उद्योगपतियों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो निर्यात ऑर्डर्स पूरे न होने से लाखों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर गहरा असर पड़ेगा।

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