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    राष्ट्रीय राजनीति में बड़े उलटफेर की सुगबुगाहट, DMK छोड़ेगा ‘INDIA’ का साथ, NDA में शामिल होने के कयास

    राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े उलटफेर की सुगबुगाहट के बीच यह चर्चा तेजी से गर्म है कि तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ का साथ छोड़कर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि यह गठबंधन आकार लेता है, तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में द्रमुक के प्रमुख नेताओं को कैबिनेट पद भी दिया जा सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा के मुख्य बिंदु

    • संसदीय गणित और क्षेत्रीय संतुलन:संसद और राष्ट्रीय राजनीति में अपने प्रभाव को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार और एनडीए अपने कुनबे को विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु में लोकसभा सीटों के लिहाज से द्रमुक एक बड़ा और मजबूत खिलाड़ी है।
    • कैबिनेट में प्रतिनिधित्व की संभावना:अटकलों के मुताबिक, यदि द्रमुक एनडीए का हिस्सा बनती है, तो केंद्र सरकार में उसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के साथ कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। इससे दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में एनडीए की उपस्थिति और प्रशासनिक पकड़ को नई मजबूती मिलेगी।
    • विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ को बड़ा झटका:द्रमुक ‘INDIA’ गठबंधन के सबसे संस्थापक और प्रमुख दलों में से एक रही है। यदि द्रमुक पाला बदलती है, तो यह विपक्षी खेमे के लिए एक बहुत बड़ा सियासी झटका साबित होगा और राष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देगा।

    क्या हैं इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे के कारण?

    1. राज्य और केंद्र के बीच समन्वय:राज्य के विकास परियोजनाओं, केंद्रीय कोष (Funds) के आवंटन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की प्रशासनिक आवश्यकता को भी इस संभावित कदम का एक कारण माना जा रहा है।
    2. भविष्य की चुनावी रणनीति:तमिलनाडु की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, राज्य में एक मजबूत और नए राजनीतिक समीकरण के निर्माण के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।

    निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

    यद्यपि इन खबरों से राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है और केंद्रीय व राज्य स्तर के नेताओं के बीच बैठकों के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक दोनों ही दलों (भाजपा व द्रमुक) के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इसकी औपचारिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि यह कयास हकीकत में बदलते हैं, तो यह भारतीय राजनीति और खासकर दक्षिण भारत के सियासी समीकरणों में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा उलटफेर माना जाएगा।

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