केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं की प्रशासनिक समीक्षा के बाद एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। गृह मंत्रालय की इस नई सूची के अनुसार, नौ राज्यों के 38 जिलों में लागू केंद्रीय सहायता और विशेष सुरक्षा दिशानिर्देशों (Guidelines) में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है।
क्या है गृह मंत्रालय का फैसला?
गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताजा वर्गीकरण रिपोर्ट के तहत, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इन 38 जिलों में जारी सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE – Security Related Expenditure) योजना और विकास केंद्रित कार्यक्रमों के नियमों को यथावत रखा जाएगा।
- आर्थिक सहायता और विकास: इन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल टावर कनेक्टिविटी, शिक्षा, जल आपूर्ति और अन्य विकास कार्यों के लिए मिलने वाली केंद्रीय वित्तीय मदद जारी रहेगी।
- विकास योजनाओं की निरंतरता: ‘विशेष केंद्रीय सहायता’ (SCA) के तहत ‘अत्यधिक प्रभावित जिलों’ और ‘चिंताजनक जिलों’ को मिलने वाली बुनियादी ढांचा सहायता में कोई कटौती नहीं की गई है, ताकि उग्रवाद के पूरी तरह खात्मे तक विकास कार्य बाधित न हों।
सुरक्षा बलों की तैनाती और सख्त नीति बरकरार
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भले ही देश भर में नक्सली हिंसा की घटनाओं और प्रभाव वाले क्षेत्रों में भारी गिरावट आई है, लेकिन इन सुरक्षा संवेदनशील जिलों में ढिलाई नहीं दी जाएगी:
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त भारत’ बनाने का लक्ष्य रखा गया था। प्रभावित राज्यों (जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) के इन चिन्हित जिलों में सुरक्षा बलों के अग्रिम बेस कैंप स्थापित करने और खुफिया निगरानी को मजबूत करने की रणनीति जारी रहेगी।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियानों का असर
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 की तुलना में पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 80% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि एक तरफ अभियानों के माध्यम से नक्सलियों के कोर इलाकों में दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। नियमों में बिना बदलाव के केंद्रीय सहायता जारी रखने का मुख्य उद्देश्य इन 38 जिलों में नक्सलवाद के बचे-खुचे आधार को भी जड़ से खत्म करना है।


