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    ट्रंप का दावा-ईरान से युद्ध अब खत्म! पश्चिम एशियाई देशों के बीच बनी सहमति, नए हमले भी रोके

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि पश्चिम एशियाई (मिडिल ईस्ट) सहयोगियों और साझेदार देशों के बीच ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा (पैरामीटर्स) पर सहमति बन गई है। इस नए समझौते की दिशा में हो रही प्रगति को देखते हुए अमेरिका ने ईरान पर करने वाले नए सैन्य हमलों को फिलहाल रोकने और टालने का फैसला किया है।

    ट्रंप के दावे और समझौते के मुख्य बिंदु

    • हॉर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण बहाली: ट्रंप ने कहा कि जिस नए समझौते का प्रारूप तैयार हो रहा है, उसके तहत रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी रुकावट के खोल दिया जाएगा।
    • परमाणु खतरे का खात्मा: राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह समाप्त करना है।
    • हमले रद्द करने की सहमति: ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “दुनिया के भविष्य के लाभ और एक सफल व समृद्ध ईरान के अस्तित्व के लिए, मैंने हमले के आदेश को रद्द करने पर सहमति व्यक्त की है, बशर्ते हम तेजी से एक स्थायी सौदा (DEAL) पूरा कर सकें।”
    • इजरायल का रुख: अमेरिका के अलावा इजरायल ने भी इस प्रतिबद्धता में शामिल होने और ईरान के साथ युद्ध को अंत तक पहुंचाने वाले समझौते को पूरा करने का प्रयास करने पर सहमति जताई है।

    सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर चर्चा

    ट्रंप का यह बयान सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर हुई बातचीत के तुरंत बाद सामने आया। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान सऊदी अरब ने अमेरिका द्वारा ईरान पर किसी भी बड़े हमले से युद्ध के और अधिक भड़कने को लेकर चिंता जताई थी। सऊदी अरब को डर था कि यदि अमेरिकी हमले बढ़ते हैं, तो ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा संपत्तियों को निशाना बना सकता है।

    युद्ध का घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति

    पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष लगभग पांच महीनों से चल रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया था। यद्यपि जून के महीने में भी युद्धविराम के अंतरिम प्रयास किए गए थे, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फिर से हुए हमलों के बाद तनाव दोबारा बढ़ गया था।

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