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    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पाकिस्तान का अब तक नहीं खुला खाता, भारत ने शानदार प्रदर्शन कर जीते इतने मैडल

    ग्लासगो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल (CWG 2026) में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन सराहनीय रहा है। भारत अब तक कुल 17 पदक (स्वर्ण, रजत और कांस्य शामिल) जीतकर तालिका में अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। भारोत्तोलन, एथलेटिक्स और पैरा-स्पोर्ट्स में भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार खेल से देश का मान बढ़ाया है। मीराबाई चानू, मुरली श्रीशंकर और अन्य खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने भारत के पदक खाते में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    वहीं दूसरी ओर, भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान का प्रदर्शन अब तक काफी निराशाजनक रहा है।

    पाकिस्तान की स्थिति और अब तक का सफर:

    1. मेडल की कमी: टूर्नामेंट के कई दिन बीत जाने के बावजूद पाकिस्तान पदक तालिका में अभी तक खाता भी नहीं खोल पाया है। स्विमिंग, बाउल्स, जूडो और जिम्नास्टिक जैसे खेलों में पाकिस्तानी एथलीटों का सफर शुरुआती दौर में ही समाप्त हो गया।
    2. अरशद नदीम पर टिकीं उम्मीदें: पाकिस्तान के दल से एकमात्र सबसे बड़ी उम्मीद उनके स्टार भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) एथलीट अरशद नदीम हैं। पेरिस ओलंपिक 2024 के स्वर्ण पदक विजेता और 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन अरशद नदीम ने जेवलिन थ्रो के क्वालिफिकेशन राउंड में 78.63 मीटर का थ्रो करके फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। पूरे देश की निगाहें अब अरशद पर टिकी हैं कि वे पाकिस्तान को खेलों का पहला पदक दिला सकें।
    3. मुक्केबाजी से भी उम्मीद: महिला मुक्केबाज फातिमा ज़हरा ने महिला 60 किग्रा वर्ग में जीत दर्ज करते हुए अगले दौर में प्रवेश किया है, जिससे मुक्केबाजी में भी पाकिस्तान के लिए पदक की संभावना बनी हुई है।
    4. अन्य एथलीटों का प्रदर्शन: अरशद नदीम के अलावा जेवलिन में उतरे मोहम्मद यासिर सुल्तान क्वालिफिकेशन राउंड से बाहर हो गए। वहीं अन्य स्पर्धाओं में शामिल अधिकांश पाकिस्तानी खिलाड़ी पदक की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।

    भारत-पाक की बहुचर्चित जंग:

    जेवलिन थ्रो के फाइनल मुकाबले में एक बार फिर भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। नीरज चोपड़ा ने भी 79.61 मीटर थ्रो के साथ फाइनल में प्रवेश कर लिया है।

    जहां भारत अपनी पदक तालिका में लगातार इजाफा कर रहा है, वहीं पाकिस्तान को अपनी लाज बचाने और पहला पदक हासिल करने के लिए मुख्य रूप से अरशद नदीम के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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