NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा प्रणाली में गिरावट को लेकर देश में जारी छात्र आंदोलन (CJP Protest) के बीच कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे देश के युवाओं के साथ सरकार “राष्ट्र के दुश्मनों” जैसा व्यवहार कर रही है।
‘कायरता और क्रूरता की हदें पार’
सोनिया गांधी ने एक लेख के जरिए केंद्र सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन, सरकार उनके साहस का जवाब संवाद से देने के बजाय लाठियों और बल प्रयोग से दे रही है।
“डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक बनने का सपना देखने वाले युवाओं से बात करने के बजाय उन पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन करना सरकार की कायरता और क्रूरता को दर्शाता है।” — सोनिया गांधी, अध्यक्ष (कांग्रेस संसदीय दल)
सोनिया गांधी के प्रमुख आरोप और बिंदु
- 20 जुलाई का पुलिस एक्शन: दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को सोनिया गांधी ने एक “काला दिन” बताया। उन्होंने मांग की कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं। YouTube
- विरोध दबाने की रणनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर असहमति या विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी और साजिश करार देने की अपनी पुरानी रणनीति पर काम कर रही है।
- सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर: केंद्र पर बजटीय कटौती का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल और उच्च शिक्षा के बजट में भारी कटौती की गई है, जिससे देश की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली संकट में है।
विपक्ष का संसद से सड़क तक हंगामा
सोनिया गांधी के इस बयान के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर संसद परिसर तक सियासी तापमान चढ़ गया है। विपक्ष ‘INDIA’ गठबंधन के बैनर तले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।


