कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने तकनीकी ढांचे और नियमों में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत ‘कर्मचारी भविष्य निधि योजना 2026’ (EPF Scheme 2026) को लागू कर दिया गया है। इस नए सेंट्रलाइज्ड आईटी एनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्रोजेक्ट के तहत पुराने डेटाबेस को पूरी तरह अपडेट कर दिया गया है।
इस बड़े ओवरहॉल (बदलाव) का उद्देश्य पीएफ क्लेम रिजेक्शन को रोकना, पारदर्शिता लाना और मैन्युअल काम को खत्म करना है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नया पोर्टल कैसे काम करेगा और नौकरीपेशा लोगों पर इसका क्या सीधा असर होगा।
नया पोर्टल कैसे काम करेगा? (Key Features)
नया सिस्टम ‘एक देश, एक डेटाबेस’ की तर्ज पर काम करता है। इसके मुख्य तकनीकी बदलाव निम्नलिखित हैं:
- सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस (Centralised Database): पहले कर्मचारियों का पीएफ डेटा अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों (Regional Offices) में बंटा होता था। अब पूरे देश का डेटा एक जगह मर्ज कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर आपने चेन्नई में काम किया है और अब पश्चिम बंगाल में हैं, तो आप अपने गृहराज्य के पीएफ ऑफिस से ही सारे काम निपटा सकेंगे।
- ऑटोमेटेड प्री-वैलिडेशन (Pre-validation): नया पोर्टल क्लेम सबमिट होने से पहले ही उसकी ऑटोमैटिक जांच कर लेगा। अगर फॉर्म में कोई कमी या गलती (Discrepancy) होगी, तो वह तुरंत सदस्य को एसएमएस या पोर्टल के जरिए बता दी जाएगी।
- क्वेरी के लिए ऑनलाइन विकल्प: यदि क्लेम प्रोसेसिंग के दौरान पीएफ अधिकारियों को किसी दस्तावेज या स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी, तो वे ऑनलाइन ही क्वेरी रेज करेंगे। सदस्य घर बैठे इसका ऑनलाइन जवाब दे सकेंगे।
आप पर इसका क्या होगा सीधा असर?
करोड़ों पीएफ खाताधारकों के लिए यह बदलाव बेहद राहत देने वाला है:
✓ क्लेम रिजेक्शन से मुक्ति और एलिजिबिलिटी की जानकारी
पहले अक्सर लोग तय सीमा से अधिक राशि के लिए क्लेम कर देते थे, जिससे फॉर्म रिजेक्ट हो जाता था। अब नए पोर्टल पर क्लेम करने से पहले ही स्क्रीन पर ‘एलिजिबल अमाउंट’ (आप कितना पैसा निकाल सकते हैं) साफ-साफ दिखाई देगा। इससे पहली बार में ही क्लेम पास होने की दर (Acceptance Rate) सुधरेगी।
✓ समय पर मिलेगा ब्याज (Auto-Interest Credit)
अक्सर पीएफ का सालाना ब्याज खातों में क्रेडिट होने में अक्टूबर-नवंबर तक का समय लग जाता था। नए पोर्टल के जरिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹1.44 लाख करोड़ का ब्याज पूरी तरह ऑटो-प्रोसेस हो चुका है और इसे 15 जुलाई 2026 तक सभी खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
✓ फाइनल सेटलमेंट पर अतिरिक्त ब्याज का फायदा
अब तक नियम था कि फाइनल सेटलमेंट के समय ब्याज केवल पिछले महीने की आखिरी तारीख तक का ही जोड़ा जाता था। लेकिन नए नियम के तहत, जिस दिन आपका भुगतान स्वीकृत (Date of Authorisation) होगा, उस दिन तक का ब्याज जोड़कर दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों को कुछ दिनों का अतिरिक्त ब्याज मिलेगा।
✓ नए विड्रॉल (निकासी) नियम और 25% का अनिवार्य बैलेंस
सभी निकासी प्रावधानों को अब तीन मुख्य श्रेणियों (जरूरी आवश्यकताएं, आवास और विशेष परिस्थितियां) में बांट दिया गया है:
- अनिवार्य मिनिमम बैलेंस: किसी भी आंशिक निकासी (जैसे- बीमारी, शादी या शिक्षा के लिए) के समय कुल फंड का 25% हिस्सा खाते में छोड़ना अनिवार्य होगा। आप केवल 75% ‘एलिजिबल बैलेंस’ ही निकाल सकेंगे।
- बीमारी और शादी: गंभीर बीमारी के लिए 12 महीने की सदस्यता के बाद 100% एलिजिबल बैलेंस निकाला जा सकता है। शादी के लिए सेवाकाल में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति होगी।
✓ नया मेंबर सर्विस हिस्ट्री इंटरफेस
लॉगिन करने के बाद यूजर्स को एक नया ‘मेंबर सर्विस हिस्ट्री’ पेज दिखेगा, जो कलर-कोडिंग के साथ आपकी पुरानी कंपनियों की आईडी, पीएफ ट्रांसफर की स्थिति और पेंडिंग रिक्वेस्ट को बेहद आसान ग्राफिक्स में दिखाएगा।


