सिंधु जल संधि निलंबन: ‘पाकिस्तान बनेगा रेगिस्तान’, पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी ने गिनाए 6 गंभीर रणनीतिक परिणाम
भारत द्वारा पिछले साल (मई 2025 में) पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को निलंबित किए जाने के फैसले से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। पाकिस्तान के जल एवं बिजली विकास प्राधिकरण (WAPDA) के चेयरमैन और पाकिस्तानी सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद सईद ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि भारत के इस कदम से पाकिस्तान के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है और वह आने वाले समय में रेगिस्तान में तब्दील हो सकता है।
पाकिस्तानी रक्षा और जल मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, इस निलंबन के कारण पाकिस्तान को निम्नलिखित 6 गंभीर रणनीतिक और आर्थिक नुकसान उठाने पड़ेंगे:
1. चिनाब नदी पर अस्तित्व का संकट
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद सईद के मुताबिक, चिनाब नदी पाकिस्तान की कृषि के लिए रीढ़ की हड्डी है, जो अकेले वहां की 1 करोड़ एकड़ कृषि भूमि को सींचती है। चूंकि इस नदी का लगभग पूरा कैचमेंट एरिया भारत में आता है, इसलिए पाकिस्तान इसके पानी के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर है। भारत द्वारा पानी रोके जाने या मोड़े जाने से पाकिस्तान का एक विशाल कृषि क्षेत्र पूरी तरह बंजर हो जाएगा।
2. भारतीय परियोजनाओं की सामूहिक क्षमता का डर
पाकिस्तान को भारत की किसी एक एकल जल विद्युत परियोजना या बांध से खतरा नहीं है, बल्कि भारत के अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर की सामूहिक क्षमता से असली डर है। भारत द्वारा चलाए जा रहे रणबीर नहर विस्तार (Ranbir Canal) और चिनाब-ब्यास लिंक टनल (Chenab-Beas Link Tunnel) जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए भारत जब चाहेगा, पश्चिमी नदियों के पानी को पूरी तरह से नियंत्रित और डायवर्ट कर सकेगा।
3. पाकिस्तान में गंभीर जल-विद्युत (Hydro-power) संकट
पाकिस्तान का अधिकांश बिजली उत्पादन और आर्थिक स्थिरता इन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) के लगातार और अनुमानित पानी के बहाव पर टिकी हुई है। भारत द्वारा नदियों के प्रवाह को मोड़ने या नियंत्रित करने से पाकिस्तान की बिजली ग्रिड पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, जिससे देश में एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट पैदा होगा।
4. हाइड्रोलॉजिकल डेटा शेयरिंग का बंद होना
समझौते के निलंबन के बाद से भारत ने पाकिस्तान के सिंधु जल कमिश्नर के साथ पश्चिमी नदियों से जुड़ा रियल-टाइम हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना बंद कर दिया है। डेटा न मिलने के कारण पाकिस्तान अब नदियों में पानी के आने वाले उतार-चढ़ाव, बाढ़ की चेतावनी या सूखे की स्थिति का पूर्वानुमान लगाने में असमर्थ हो गया है, जो उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा अंधा मोड़ (Blind spot) बन चुका है।
5. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और खाद्य असुरक्षा का ढहना
पाकिस्तान एक कृषि प्रधान देश है जिसका पूरा नहरी तंत्र सिंधु बेसिन पर निर्भर है। पानी की आपूर्ति में मामूली कमी भी कपास, गेहूं और चावल जैसी मुख्य फसलों को तबाह कर देगी। इससे न केवल देश में भुखमरी की स्थिति पैदा होगी बल्कि कृषि निर्यात ठप होने से उसकी कंगाली और बढ़ जाएगी।
6. पर्यावरणीय तबाही और अल-नीनो का दोहरा प्रहार
एक तरफ भारत ने पानी का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है, तो दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो (El Niño) के कारण ऊपरी सिंधु बेसिन पहले से ही सूखे की चपेट में आ रहा है। पानी के प्राकृतिक बहाव में कमी आने से पाकिस्तान के डेल्टा क्षेत्रों में समुद्र का खारा पानी आगे बढ़ रहा है, जिससे जमीनी पानी खारा हो रहा है और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तबाह हो रहा है।
निष्कर्ष: पाकिस्तानी जनरलों और अधिकारियों का मानना है कि भारत अब बिना युद्ध लड़े केवल ‘वॉटर वेपन’ (जल हथियार) के इस्तेमाल से पाकिस्तान को घुटनों पर ला सकता है। यदि भारत ने चिनाब और ब्यास लिंक प्रोजेक्ट्स के तहत पानी पूरी तरह डायवर्ट कर दिया, तो पाकिस्तान को रेगिस्तान बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।


