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    शिवसेना दिलों में है और एक ही हो सकती है, उद्धव ठाकरे ने अमित शाह को दिया जवाब

    महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ (Operation Tiger) को लेकर घमासान चरम पर है। शिवसेना (UBT) के सांसदों के पाला बदलने की अटकलों और दावों के बीच उद्धव ठाकरे ने सीधे जनता का रुख किया है। उन्होंने मुंबई में आयोजित एक जनसभा के दौरान विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए साफ संदेश दिया कि “शिवसेना सिर्फ एक ही हो सकती है।”

    क्या है पूरा विवाद?

    ‘ऑपरेशन टाइगर’ दरअसल शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसदों को तोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल करने की एक राजनीतिक रणनीति (कथित तौर पर बीजेपी और शिंदे गुट द्वारा) को दिया गया नाम है।

    • सांसदों की बगावत: उद्धव गुट के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं। दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागियों को दो-तिहाई बहुमत (यानी कम से कम 6 सांसद) की जरूरत है।
    • शिंदे-फडणवीस का दावा: हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर और धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर जैसे नेताओं ने खुले तौर पर उद्धव का साथ छोड़कर शिंदे गुट में जाने की पुष्टि की है। इन नेताओं ने क्षेत्र में विकास और फंड की कमी को पाला बदलने की वजह बताया है।

    जनता की अदालत में उद्धव ठाकरे

    सांसदों के टूटने की खबरों के बीच, उद्धव ठाकरे बिल्कुल भी बैकफुट पर नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने जनता के बीच जाकर विरोधियों को ललकारा है, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि अब सिर्फ एक ही शिवसेना बची है जो शिंदे के पास है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि शिवसेना कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे चुराया जा सके। असली शिवसेना जनता के दिलों में है और वह सिर्फ एक ही हो सकती है, जो बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर टिकी है।”

    उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं और जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे इन दलबदलों से निराश या हतोत्साहित नहीं हैं। पार्टी को बचाने और गद्दारी का जवाब देने के लिए वे 26 से 29 जून तक महाराष्ट्र के छह विभिन्न क्षेत्रों का तूफानी दौरा करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि उद्धव विशेष रूप से उन संसदीय क्षेत्रों का दौरा करने जा रहे हैं, जहां के सांसदों पर पाला बदलने का आरोप है।

    कानूनी और रणनीतिक लड़ाई

    एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे जनता के बीच माहौल बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके रणनीतिकार कानूनी घेराबंदी में जुटे हैं:

    1. स्पीकर को पत्र: शिवसेना (UBT) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर साफ किया है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत केवल संख्या बल (दो-तिहाई) होना काफी नहीं है, बल्कि मूल ‘राजनीतिक पार्टी’ का विलय भी होना अनिवार्य है।
    2. संजय राउत का पलटवार: राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बीजेपी और शिंदे गुट पर सांसदों को ₹50-50 करोड़ का लालच देने और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

    महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ‘ऑपरेशन टाइगर’ ने सूबे के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। अब देखना यह होगा कि उद्धव ठाकरे की ‘जनता की अदालत’ उनके इस सबसे बड़े संकट को टाल पाती है या नहीं।

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