फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) से भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक चिंता सामने आ रही है। सम्मेलन के दूसरे दिन जी7 देशों के नेताओं ने यूक्रेन युद्ध को एक बार फिर अपने शीर्ष एजेंडे पर लेते हुए रूस के खिलाफ नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इस फैसले का सीधा असर भारत को रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल (Discounted Russian Oil) की सप्लाई पर पड़ने वाला है, जिससे भारत की ‘टेंशन’ बढ़ गई है।
रूसी तेल पर छूट खत्म होने का खतरा
पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) संकट के दौरान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने मार्च में रूसी तेल शिपमेंट पर लगी कुछ पाबंदियों में ढील दी थी। भारत ने इस ढील का फायदा उठाकर रूस से बड़े पैमाने पर रियायती दरों पर तेल खरीदा।
अब जी7 सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि चूंकि खाड़ी देशों में शांति समझौते के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) से तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य हो रही है, इसलिए अमेरिका रूस पर ढीले किए गए प्रतिबंधों को दोबारा सख्त (Reimpose) करने जा रहा है।
इस कदम से होने वाले प्रभाव इस प्रकार हैं:
- सस्ते तेल का अंत: अमेरिका और कनाडा द्वारा रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त टैंकरों) और ऊर्जा क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाने से भारत को रूस से मिलने वाला डिस्काउंट खत्म या बेहद कम हो सकता है।
- घरेलू बाजार पर असर: यदि रूस से सस्ता तेल मिलना बंद होता है, तो भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
यूक्रेन को एयर डिफेंस और मिसाइलें देने का बड़ा ऐलान
जी7 नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर यूक्रेन के प्रति अपने “अटूट समर्थन” को दोहराया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की मौजूदगी में जी7 देशों ने रूसी हमलों का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन को एक बड़ा सैन्य पैकेज देने की घोषणा की:
- पैट्रियट मिसाइलें और इंटरसेप्टर्स: रूस द्वारा हाल ही में यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड और शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों के जवाब में यूक्रेन को अतिरिक्त पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियां (Air Defense Systems) और इंटरसेप्टर मिसाइलें दी जाएंगी।
- लॉन्ग-रेंज क्षमताएं: यूक्रेनी सेना को लंबी दूरी तक मार करने वाले आधुनिक हथियार (Long-Range Assets) सौंपे जाएंगे ताकि वे युद्धक्षेत्र में अपनी बढ़त को मजबूत कर सकें।
- सैन्य उत्पादन लाइसेंस: जी7 देश यूक्रेन को अपने देशों से सैन्य उपकरणों के निर्माण से जुड़े लाइसेंस देने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि यूक्रेन खुद हथियारों का उत्पादन बढ़ा सके।
भारत का रुख और कूटनीतिक संतुलन
जी7 के आउटरीच सत्र में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैश्विक तनाव के बीच भारत की चिंताओं को प्रमुखता से रखा। पीएम मोदी ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में हुए व्यापारिक व्यवधानों और संघर्ष में निर्दोष भारतीय नागरिकों (नाविकों) की जान जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया।
| जी7 का फैसला | भारत के लिए चुनौती / प्रभाव |
| रूस पर कड़े ऊर्जा प्रतिबंध | भारत के लिए सस्ते तेल का विकल्प बंद होना, घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम। |
| यूक्रेन को भारी सैन्य मदद | रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खिंचना, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। |
विशेषज्ञों का कहना है कि जी7 के इस नए कदम के बाद, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात में भारत अपने ऊर्जा हितों की रक्षा करने और रूस के साथ अपने पारंपरिक आर्थिक समझौतों को बनाए रखने के लिए अमेरिका के सामने अपनी बात मजबूती से रख सकता है।


