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    हीरों से निर्मित 1250 शिलाएं गायब, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठन का दावा

    योध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब राम मंदिर के चंदे और दान को लेकर एक नया और बेहद सनसनीखेज विवाद खड़ा हो गया है। ‘धर्मसेना’ के संस्थापक संतोष दुबे ने दावा किया है कि मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के रामभक्तों द्वारा दान की गई सोने, चांदी, अष्टधातु और कीमती हीरों से जड़ी करीब 1,250 ‘श्रीराम शिलाएं’ (पूजित ईंटें) गायब हो गई हैं। इस सनसनीखेज दावे के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों के बीच एक नया विवाद शुरू होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

    ‘धर्मसेना’ प्रमुख का बड़ा और सनसनीखेज दावा

    राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले और धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए इस पूरे मामले को उठाया है। उनके दावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    • 1,250 कीमती शिलाएं गायब: संतोष दुबे का आरोप है कि आंदोलन के दौरान और उसके बाद, दुनिया भर के संपन्न रामभक्तों और राजा-महाराजाओं के वंशजों ने सोने, शुद्ध चांदी, अष्टधातु और बेशकीमती हीरों से निर्मित 1,250 से अधिक विशेष श्रीराम शिलाएं दान की थीं, जो अब रिकॉर्ड या लॉकर में दिखाई नहीं दे रही हैं।
    • चंदे में हेराफेरी का आरोप: उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए करोड़ों रुपये के चंदे, सोने और चांदी की ईंटों के रखरखाव में भारी पारदर्शिता की कमी रही है और इसमें बड़ी चोरी या हेराफेरी की आशंका है।
    • मूर्तियों और अवशेषों पर सवाल: उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाबरी ढांचे के ढहने के समय और उसके बाद की खुदाई में मिले प्राचीन मंदिर के कसौटी पत्थरों के खंभे और मूर्तियां वर्तमान में कहां सुरक्षित रखी गई हैं, इसका कोई स्पष्ट सार्वजनिक विवरण नहीं है।

    पहले भी सामने आ चुके हैं दान के विवाद

    यह पहली बार नहीं है जब अयोध्या राम मंदिर के दान या जमीन खरीद को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इससे पहले भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कई तरह के आरोप लग चुके हैं:

    विवाद का समयमुख्य विषय / आरोप
    जमीन खरीद विवादअयोध्या में मंदिर परिसर के पास कौड़ियों के दाम खरीदी गई जमीन को कुछ ही मिनटों में ट्रस्ट द्वारा करोड़ों रुपये में खरीदने के आरोप विपक्ष ने लगाए थे।
    चेक बाउंस का मामलाराम मंदिर निधि समर्पण अभियान के दौरान दान में मिले करीब 15,000 से अधिक चेक (लगभग ₹22 करोड़ मूल्य के) तकनीकी कारणों या खातों में पैसे न होने की वजह से बाउंस हो गए थे।
    सोने-चांदी का वजनभक्तों द्वारा दान किए गए क्विंटल सोने और चांदी की शुद्धता जांचने और उन्हें सुरक्षित पिघलाने को लेकर भी प्रशासनिक चुनौतियां सामने आई थीं।

    ट्रस्ट की संभावित प्रतिक्रिया और जांच की मांग

    संतोष दुबे के इस नए और तीखे हमले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, ट्रस्ट के पदाधिकारियों का हमेशा से यह रुख रहा है कि मंदिर को मिले एक-एक पैसे, सोने, चांदी और अन्य उपहारों का पूरा डिजिटल और भौतिक ऑडिट (Audit) किया जा रहा है और पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है।

    संतोष दुबे की मांग: “यह देश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनकी गाढ़ी कमाई के दान का मामला है। केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले का संज्ञान लेकर एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करनी चाहिए, ताकि गायब हुई कीमती शिलाओं का सच सामने आ सके।”

    इस नए दावे ने उत्तर प्रदेश की सियासत और धार्मिक गलियारों में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है, खासकर तब जब राज्य में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो रही हैं।

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