अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए ऐतिहासिक शांति समझौते का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम कूटनीतिक प्रगति पर खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की बहाली को लेकर भारत की उम्मीदें जताईं। आइए पीएम मोदी के बयान के मुख्य बिंदुओं और इसके वैश्विक महत्व को समझते हैं:
पीएम मोदी के बयान की 3 बड़ी बातें
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक बयान में इस समझौते के बहुआयामी प्रभावों को रेखांकित किया:
- सहमति का स्वागत और वैश्विक चिंता: पीएम मोदी ने लिखा, “मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस युद्ध ने दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा किया है और कई देशों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।”
- व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता: भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उम्मीद जताई, “भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नौवहन (Navigation) व वाणिज्य (Commerce) की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।”
- अंतिम समझौते की आशा: प्रधानमंत्री ने भविष्य की बातचीत पर जोर देते हुए कहा कि भारत बाकी बचे हुए मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं को सकारात्मक रूप से देख रहा है, ताकि दोनों देश एक स्थायी और अंतिम समझौते तक पहुंच सकें。
भारत के लिए क्यों जरूरी था यह समझौता?
पिछले 107 दिनों से जारी इस जंग (जो 28 फरवरी को शुरू हुई थी) ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था। भारत के लिए यह समझौता निम्नलिखित कारणों से बेहद राहत भरा है:
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): युद्ध की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित हो गई थी, जिससे भारत में महंगाई बढ़ने और ईंधन संकट का खतरा मंडरा रहा था।
- सुरक्षित समुद्री मार्ग: होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी हटने से भारतीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही सुरक्षित हो जाएगी, जिससे भारत का लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा।
- नागरिकों की सुरक्षा: खाड़ी देशों और ओमान के तटों के पास हुए हमलों में कई भारतीय नागरिकों और जहाजों को भी नुकसान उठाना पड़ा था, जिस पर अब पूरी तरह विराम लग जाएगा।
शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणाओं के अनुसार, कतर और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों की मध्यस्थता से तैयार हुए इस शांति समझौते पर आगामी शुक्रवार (19 जून, 2026) को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी टोल के तुरंत खोलने का निर्देश जारी कर वैश्विक शिपिंग कंपनियों से अपने इंजन शुरू करने का आह्वान किया है। पीएम मोदी के इस रुख से साफ है कि भारत इस क्षेत्र में स्थिरता लाने वाले हर कूटनीतिक प्रयास के साथ मजबूती से खड़ा है।


