पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर बगावत का बिगुल फूंकने वालीं वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट ने एक बड़ा दावा करते हुए लोकसभा में टीएमसी को दोफाड़ करने की पूरी तैयारी कर ली है। काकोली गुट का दावा है कि उनके साथ सांसदों की संख्या बढ़कर अब 22 हो चुकी है, जिसके बाद वे सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मिलकर संसद में एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सजदा अहमद ममता के साथ हैं।
काकोली गुट का बड़ा दावा: आंकड़ों का गणित
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल सांसदों की संख्या को देखते हुए काकोली गुट का यह दावा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मुख्य पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका है:
- जादुई आंकड़ा पार करने का दावा: काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि उनके विद्रोही खेमे में अब 22 लोकसभा सांसद शामिल हो चुके हैं।
- दलबदल कानून से बचाव: भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी दल से अलग होकर नया गुट बनाने या विलय करने के लिए कुल सांसदों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा में टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या को देखते हुए 22 का यह आंकड़ा इस कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पर्याप्त है।
सोमवार को स्पीकर से मुलाकात की रणनीति
विद्रोही गुट अब कानूनी और प्रशासनिक रूप से अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कदम उठा रहा है:
- अलग गुट की मांग: काकोली गुट के नेताओं ने बताया कि उन्होंने सोमवार (15 जून) को लोकसभा अध्यक्ष से मिलने का समय मांगा है। मुलाकात के दौरान वे औपचारिक रूप से 22 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपेंगे और सदन में तृणमूल कांग्रेस से अलग एक स्वतंत्र विद्रोही गुट के रूप में बैठने की अनुमति और मान्यता की मांग करेंगे।
- पार्टी व्हिप का उल्लंघन नहीं: अलग गुट के रूप में मान्यता मिलने के बाद यह धड़ा संसद के भीतर मुख्य टीएमसी के व्हिप (Whip) से पूरी तरह आजाद हो जाएगा और अपनी मर्जी से मतदान या संसदीय प्रक्रियाओं में हिस्सा ले सकेगा।
बगावत के पीछे की मुख्य वजह
पार्टी के भीतर अचानक भड़की इस बड़ी बगावत के पीछे कई महीनों से चल रही अंदरूनी कलह को मुख्य वजह माना जा रहा है:
- नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया पर असंतोष: विद्रोही सांसदों का आरोप है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
- अभिषेक बनर्जी बनाम वरिष्ठ नेता: राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टकराव अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के युवा चेहरों (अभिषेक बनर्जी गुट) और काकोली घोष दस्तीदार जैसे पुराने और वरिष्ठ सांसदों के बीच लंबे समय से चल रही वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है।
ममता बनर्जी खेमे की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, कोलकाता में टीएमसी के मुख्य प्रवक्ता और ममता बनर्जी के वफादार नेताओं ने काकोली गुट के इन दावों को पूरी तरह खारिज और निराधार बताया है। मुख्य पार्टी का दावा है कि विद्रोही खेमा केवल भ्रामक आंकड़े पेश कर दबाव बनाने की राजनीति कर रहा है। बहरहाल, सोमवार को होने वाली स्पीकर के साथ बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा कि लोकसभा में टीएमसी का भविष्य क्या मोड़ लेता है।


