भारत ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित और जेट इंजन से संचालित मानवरहित हवाई वाहन (UAV) ‘दिव्यास्त्र एमके3’ (Divyastra MK3) ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली है। इसे भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स और अनुसंधान संगठनों के सहयोग से विकसित किया गया है।
यह ड्रोन भारतीय सशस्त्र बलों की सामरिक (Tactical) और निगरानी (Surveillance) क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।
दिव्यास्त्र एमके3 की प्रमुख विशेषताएं (Key Features)
- जेट-पावर्ड प्रोपल्शन: पारंपरिक प्रोपेलर वाले ड्रोन के विपरीत, दिव्यास्त्र एमके3 में माइक्रो-जेट इंजन का उपयोग किया गया है। इससे यह अत्यधिक उच्च गति और तेज गतिशीलता (Maneuverability) प्रदान करता है।
- उच्च गति और पेलोड क्षमता: जेट इंजन की बदौलत यह यूएवी 500 से 600 किमी/घंटा तक की गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह अपने साथ उन्नत कैमरे, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) पेलोड और घातक हथियार ले जा सकता है।
- स्टील्थ और कम रडार सिग्नेचर: इसका एयरोडायनामिक डिजाइन और इस्तेमाल की गई कंपोजिट सामग्री इसे दुश्मन के रडार की पकड़ से दूर रखने में मदद करती है।
- ऑटोनॉमस नेविगेशन: यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वदेशी जीपीएस/नाविक (NavIC) प्रणाली पर काम करता है, जिससे यह जीपीएस-नाकामयाब (GPS-denied) क्षेत्रों में भी पूरी सटीकता से ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है।
दिव्यास्त्र एमके3: तकनीकी विनिर्देश (Specifications)
| पैरामीटर | विवरण |
|---|---|
| प्रकार | जेट-पावर्ड ऑटोनॉमस अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) |
| इंजन | स्वदेशी माइक्रो-टर्बोजेट इंजन |
| अधिकतम गति | 500 – 600 किमी/घंटा |
| उड़ान ऊंचाई (Service Ceiling) | 30,000 फीट से अधिक |
| ऑपरेशनल रेंज | 400 किमी से अधिक |
| मुख्य भूमिका | टोही (Reconnaissance), स्ट्राइक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर |
भारतीय सेना के लिए क्यों है अहम?
- सीमाओं पर चौकस निगरानी: चीन और पाकिस्तान से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) जैसे चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाकों में उच्च गति से निगरानी के लिए यह बेहद उपयोगी साबित होगा।
- लागत में किफ़ायती और सुरक्षित: जेट लड़ाकू विमानों की तुलना में दिव्यास्त्र एमके3 को किसी भी जोखिम भरे मिशन में भेजना बहुत कम खर्चीला है, जिससे पायलटों की जान का जोखिम भी शून्य हो जाता है।
- ‘स्वदेशी’ रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र: इस सफल परीक्षण से साबित हो गया है कि भारत अब एयरोस्पेस और यूएवी तकनीक के क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को खत्म करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


