अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 3 महीनों से जारी गंभीर सैन्य तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संकट को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौते का मसौदा (Draft) तैयार हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ जहां इस समझौते को रविवार (14 जून) को ही अंतिम रूप देने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं तेहरान (ईरान) ने संकेत दिए हैं कि अंतिम फैसले में अभी कुछ और समय लग सकता है।
इस समझौते के तहत ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को जारी करने और तेल प्रतिबंधों पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
25 अरब डॉलर की संपत्तियां होंगी बहाल?
समझौते के मसौदे के अनुसार, दोनों देशों के बीच वित्तीय और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई महत्वपूर्ण सहमति बनती दिख रही है:
- अवरुद्ध फंड की बहाली: ईरान को इस समझौते से बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। इसके तहत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जमी हुई ईरान की लगभग 24 से 25 अरब डॉलर की संपत्ति (Assets) को बहाल किया जा सकता है।
- तेल प्रतिबंधों में राहत: अमेरिका वार्ता के नियमों के तहत ईरान पर लगाए गए कड़े कच्चे तेल के निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत हो सकता है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।
- परमाणु कार्यक्रम पर सहमति: बदले में, ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना होगा। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ईरान के मौजूदा संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) और परमाणु सामग्री को नष्ट या डाउनब्लेंड (Downblend) किया जाएगा ताकि वह कभी परमाणु हथियार न बना सके।
अंतिम समझौता कब और क्यों टल सकती है तारीख?
शांति वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ ने कहा है कि अगले 24 घंटों के भीतर एक ‘इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग’ (Electronic Signing) के जरिए प्रारंभिक सहमति बन सकती है, जिसके बाद तकनीकी स्तर की आधिकारिक बातचीत अगले सप्ताह शुरू होगी।
हालांकि, तारीख आगे बढ़ने के आसार भी दिखाई दे रहे हैं, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- ईरान का इनकार: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने रविवार को ही किसी अंतिम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने की संभावना को खारिज कर दिया है।
- नई शर्तें थोपने का आरोप: तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी प्रशासन बातचीत के अंतिम क्षणों में कुछ ऐसी नई शर्तें जोड़ रहा है जो पहले तय नहीं थीं।
- विद्रोही गुटों पर प्रतिबंध: अमेरिका चाहता है कि ईरान लेबनान और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में सक्रिय अपने सहयोगी विद्रोही गुटों को वित्तीय और सैन्य मदद देना तुरंत बंद करे, जिसपर अंतिम सहमति बनना बाकी है।
आगे की राह और चेतावनी:
यदि यह समझौता सफलता पूर्वक साइन हो जाता है, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल टैंकरों के लिए तुरंत खोल दिया जाएगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट थमेगा। लेकिन, यदि ईरान ने इसे टालने की कोशिश की, तो डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत बंद कर ‘अंतिम विकल्प’ (Ultimate Alternative) के रूप में ईरान पर बड़े सैन्य हमले की कड़ी चेतावनी भी दी है।


