श्चिम एशिया (Middle East) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब और अधिक आक्रामक मोड़ ले चुका है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US Navy’s 5th Fleet) के मुख्यालय पर बड़ा ड्रोन हमला किया है।
इस ताजा सैन्य टकराव और क्षेत्र के मौजूदा हालातों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
तनाव भड़कने की मुख्य वजह (क्रोनोलॉजी)
यह ताजा विवाद एक-दूसरे पर किए गए हवाई हमलों (Tit-for-tat strikes) का नतीजा है:
- अमेरिकी हेलीकॉप्टर का गिरना: इस तनाव की शुरुआत तब हुई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका का एक अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त (या मार गिराया) गया।
- अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में स्थित IRGC के ठिकानों और मिसाइल लॉन्च पैड्स सहित करीब 20 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए।
- ईरान का पलटवार: अमेरिका के इसी हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने बुधवार (10 जून 2026) की सुबह करीब 2:30 बजे बहरीन में अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर कई ‘शाहिद-136’ (Shahed-136) सुसाइड ड्रोन दागे।
हमले का दायरा और नुकसान का दावा
ईरान ने इस बार केवल बहरीन ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व के कई अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया है।
ईरान के निशाने पर अमेरिकी बेस ➔ बहरीन (नौसेना मुख्यालय) | जॉर्डन (मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस) | कुवैत
- बहरीन में सायरन की गूंज: बहरीन की राजधानी मनामा में अमेरिकी नौसेना मुख्यालय को निशाना बनाए जाने के बाद पूरे देश में एयर रेड सायरन (हवाई हमले की चेतावनी) बजने लगे। बहरीन के गृह मंत्रालय ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी है।
- जॉर्डन और कुवैत पर भी मिसाइलें: ईरान ने जॉर्डन के उस एयरबेस पर भी मिसाइलें दागीं जहां अमेरिकी F-35 फाइटर जेट तैनात हैं। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने सीमा में घुसने से पहले ही 5 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया।
- अमेरिका का बयान: अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ईरान की तरफ से आए अधिकांश ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने या बेस को बड़ा नुकसान पहुंचने की खबर नहीं है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस ताजा हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तुरंत उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 0.9% बढ़कर 92.29 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड (WTI) 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी इस टकराव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिसने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं।


