नई दिल्ली में सोमवार को विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और अंदरूनी खींचतान के बीच हुई इस बैठक में विपक्ष के कई बड़े चेहरों ने शिरकत की, लेकिन कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति ने गठबंधन के भीतर की रार को भी उजागर कर दिया।
बैठक से नदारद रहीं कुछ प्रमुख पार्टियां
गठबंधन की इस अहम बैठक में एकजुटता दिखाने की कोशिशों को तब झटका लगा जब कुछ बड़े दलों ने इससे दूरी बना ली:
- TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम): तमिल अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ इस बैठक से पूरी तरह नदारद रही। तमिलनाडु के हालिया सियासी घटनाक्रमों के बाद टीवीके और कांग्रेस के बीच बढ़े तालमेल से द्रमुक (DMK) नाराज चल रही है, जिसका असर बैठक की उपस्थिति पर साफ दिखा।
- AAP और DMK का रुख: रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के शीर्ष नेताओं ने भी इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिसने विपक्षी एकता की रणनीतिक तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाए तीन बड़े मुद्दे
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार को घेरने के लिए तीन मुख्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया:
- महंगाई (Inflation): खरगे ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई और आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की।
- विदेश नीति (Foreign Policy): पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक मोर्चे पर भारत की मौजूदा स्थिति को देखते हुए खरगे ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए और विपक्ष की ओर से एक स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाने की वकालत की।
- SIR का मुद्दा: निर्वाचन आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की ‘एसआईआर’ (SIR) नीति और प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते देश के करोड़ों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया की आड़ में लाखों वास्तविक और वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। खरगे ने गठबंधन के सभी सहयोगी दलों से आह्वान किया कि इस तरह के चुनावी और प्रशासनिक सुधारों के नाम पर हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होकर संसद और जनता के बीच आवाज उठानी होगी।
अंदरूनी कलह और भविष्य की रणनीति
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी नेताओं के ही बयानों वाले कांग्रेस विरोधी पोस्टर चपके नजर आए हैं। हालांकि, बैठक के भीतर मौजूद नेताओं ने इन मतभेदों को दरकिनार कर आगामी मानसून सत्र में सरकार को साझा मुद्दों पर संसद से सड़क तक घेरने की रणनीति पर चर्चा की। खरगे ने सभी सहयोगी दलों से अपील की कि वे राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुट रहें ताकि देश के सामने एक मजबूत लोकतांत्रिक विकल्प पेश किया जा सके।


