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    चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को रोकने की तैयारी, इन राज्यों को मिलेगा फायदा, पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन

    केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को एक और बड़ा रणनीतिक झटका देते हुए चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन में मोड़ने के लिए 31 जुलाई 2029 की समय सीमा (डेडलाइन) तय कर दी है। लगभग 2,352 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी ‘चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना’ को मंजूरी मिल चुकी है और इस पर काम तेज कर दिया गया है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में स्थित है, जिसके जरिए पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को भारत अपने फायदे के लिए रोकेगा।

    परियोजना की मुख्य रूपरेखा (Project Overview)

    मुख्य बिंदुविवरण
    परियोजना का नामचिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट
    अनुमानित लागत₹2,352 करोड़ (कुल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित करीब ₹2,600 करोड़)
    सुरंग की लंबाई8.7 किलोमीटर
    तय डेडलाइन31 जुलाई 2029
    एजेंसीनेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC)

    क्या है पूरा प्लान और इंजीनियरिंग?

    यह ‘लिंक-3’ परियोजना लाहौल-स्पीति की लाहौल घाटी में चिनाब की सहायक नदी चंद्रा नदी पर प्रस्तावित है। इसके तहत नदी पर 19 मीटर ऊंचा एक बैराज और इनटेक बनाया जाएगा। इसके बाद 8.7 किलोमीटर लंबी जल परिवहन सुरंग (अंडरग्राउंड टनल) के जरिए अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली में डाइवर्ट किया जाएगा। जलमार्ग परिवर्तन का यह मुख्य स्थल कोसकर गांव के पास और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अटल सुरंग (रोहतांग) के उत्तरी प्रवेश द्वार के ऊपर स्थित है।

    पाकिस्तान को क्यों लगा बड़ा झटका?

    1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत चिनाब, झेलम और सिंधु (पश्चिमी नदियां) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को आवंटित था, जिसका उपयोग वह अपनी विशाल नहरों और खेती के लिए करता है। लेकिन पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस संधि के क्रियान्वयन को निलंबित कर दिया था।

    अब भारत अपनी सीमा के भीतर चिनाब के पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए स्वतंत्र है। इस सुरंग के बनने से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के प्रवाह में भारी कमी आएगी, जिससे पाकिस्तान के कृषि क्षेत्रों और जल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।

    भारत को होने वाले बड़े फायदे

    • 4000 MW अतिरिक्त बिजली: पानी को मोड़ने और इसके वेग का इस्तेमाल करने से हिमाचल प्रदेश में लगभग 4,000 मेगावाट अतिरिक्त पनबिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा।
    • उत्तरी राज्यों को पानी: ब्यास नदी में पानी का स्तर बढ़ने से यह पानी आगे पंजाब के ‘हरिके बैराज’ तक पहुंचेगा। वहां से इसे भारत की सबसे बड़ी नहर ‘इंदिरा गांधी नहर’ में डाइवर्ट किया जाएगा, जिससे पंजाब, हरियाणा और विशेषकर राजस्थान के सूखे इलाकों में सिंचाई और पेयजल की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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