कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार (DKS) के बीच बीते तीन साल से चली आ रही खींचतान महज तीन दिनों के भीतर सुलझ गई। वर्ष 2023 में जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तभी से दोनों नेताओं के बीच सत्ता के बंटवारे (Power-sharing) को लेकर अंदरूनी जंग जारी थी।
आइए जानते हैं कि तीन साल का यह लंबा राजनीतिक सस्पेंस आखिरकार तीन दिन में कैसे खत्म हुआ और इसकी पूरी टाइमलाइन क्या रही:
3 साल की खींचतान 3 दिन में कैसे सुलझी?
इस पूरे विवाद को सुलझाने में कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी) की रणनीतिक भूमिका रही। जब हाल ही में यह संकट चरम पर पहुंचा, तो आलाकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली तलब किया। सिद्धारमैया को सम्मानजनक विदाई देने के लिए केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी और राज्यसभा सीट का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। वहीं, डी.के. शिवकुमार के धैर्य और संगठन के प्रति वफादारी को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंपने का भरोसा दिया गया। इस आपसी समझौते के बाद आखिरकार सिद्धारमैया ने पद छोड़ने का फैसला किया।
कब-क्या हुआ? (मुख्य घटनाक्रम और टाइमलाइन)
- मई 2023 (शुरुआती समझौता): कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी जीत के बाद सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार दोनों मुख्यमंत्री पद के दावेदार बने। दिल्ली में लंबी बैठकों के बाद सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, तब ‘ढाई-ढाई साल’ का गुप्त फॉर्मूला तय हुआ था।
- वर्ष 2024 – 2025 (अंदरूनी खींचतान): सरकार के दो साल पूरे होने के करीब आते ही डी.के. शिवकुमार के समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग तेज कर दी। वहीं, सिद्धारमैया के खेमे ने किसी भी औपचारिक ‘पावर-शेयरिंग’ समझौते से इनकार किया, जिससे पार्टी में दरार गहरी होती गई।
- अप्रैल – मई 2026 (संकट चरम पर): कैबिनेट विस्तार और संगठन में बदलावों को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद अपने चरम पर पहुंच गया। दोनों पक्षों के विधायकों ने दिल्ली जाकर आलाकमान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
आखिरी 3 दिनों का घटनाक्रम (फैसले की घड़ी)
| दिन | मुख्य राजनीतिक गतिविधि |
| पहला दिन (26 मई) | सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। आलाकमान ने नेतृत्व परिवर्तन का अंतिम प्रस्ताव दोनों के सामने रखा। |
| दूसरा दिन (27 मई) | दोनों नेता दिल्ली से बेंगलुरु वापस लौटे। डी.के. शिवकुमार के खेमे में जश्न का माहौल शुरू हुआ, जबकि सिद्धारमैया ने अपने करीबी मंत्रियों के साथ गुप्त बैठकें कर विदाई की रूपरेखा तैयार की। |
| तीसरा दिन (28 मई – आज) | सिद्धारमैया ने अपने आवास पर कैबिनेट मंत्रियों के लिए ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ बुलाई, जहां उन्होंने आधिकारिक तौर पर पद छोड़ने का एलान कर दिया। इसी बैठक में दोनों नेताओं ने गले मिलकर एकजुटता का संदेश दिया। |
वर्तमान स्थिति: सिद्धारमैया आज दोपहर बाद अपना इस्तीफा राज्यपाल सचिवालय को सौंप सकते हैं। इसके बाद विधायक दल की बैठक में औपचारिक रूप से डी.के. शिवकुमार को नया नेता चुना जाएगा, जिसके बाद कल (29 मई) उनका शपथ ग्रहण समारोह संभावित है।


