अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तेहरान (ईरान) ने युद्ध को टालने और शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थों के माध्यम से एक नया प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान पर बड़े सैन्य हमले की तैयारी की जा रही है। युद्ध के इस साए के बीच, ईरान ने तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खोलने की पेशकश की है।
ईरान का नया प्रस्ताव और शर्तें एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, तेहरान ने शांति समझौते के एक नए मसौदे (ड्राफ्ट) में कुछ शर्तें रखी हैं। इस प्रस्ताव के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले उसने अमेरिका के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म किया जाए।
- ईरान की जब्त की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को तुरंत बहाल किया जाए।
- युद्ध के कारण ईरान को हुए आर्थिक और भौतिक नुकसान के मुआवजे की व्यवस्था की जाए।
परमाणु कार्यक्रम और बातचीत पर रुख
ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि तेहरान सबसे पहले युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक समझौता चाहता है। इसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर कोई नई बातचीत शुरू की जा सकती है। ईरान का मानना है कि बातचीत में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका की यह जिद है कि चर्चा केवल परमाणु मुद्दे के दायरे में ही हो, जबकि ईरान व्यापक सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला होता है, तो उनकी जवाबी तैयारी पूरी है।
ट्रंप की ओर से हमले की तैयारी
दूसरी तरफ, वॉशिंगटन से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने हाल ही में ओवल ऑफिस में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि आखिरी समय पर कोई कूटनीतिक सफलता हासिल नहीं होती है, तो अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह भी संकेत दिया कि वह देश की परिस्थितियों के कारण वॉशिंगटन में ही रुकेंगे, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नया प्रस्ताव युद्ध को टालने में सफल हो पाता है या नहीं।


