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    पारा 48 डिग्री के पार, 28 मई तक भीषण लू का अलर्ट, पहाड़ों पर भी गर्मी का टॉर्चर

    उत्तर और मध्य भारत सहित देश के एक बड़े हिस्से में सूर्य का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मैदानों से लेकर पहाड़ों तक तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के कई राज्यों में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अगले छह दिनों तक देश के कई हिस्सों में हीटवेव का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।

    इन राज्यों में पारा 48 डिग्री के पार

    देश के मैदानी इलाके इस समय भट्ठी की तरह तप रहे हैं। मुख्य रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा के कई शहरों में तापमान ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं:

    • राजस्थान का हाल: मरुस्थल के कई जिलों में पारा 48 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है, जहां दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है।
    • उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र और मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भी सूरज आग उगल रहा है, जिससे दिन के साथ-साथ रातें भी बेहद गर्म और बेचैन करने वाली हो गई हैं।

    28 मई तक राहत नहीं: मौसम विभाग की चेतावनी

    आईएमडी (IMD) के वैज्ञानिकों के मुताबिक, फिलहाल इस जानलेवा गर्मी और लू के थपेड़ों से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है:

    • लगातार चलेगी हीटवेव: मौसम विभाग का अनुमान है कि 28 मई तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों में भीषण लू (Severe Heatwave) का प्रकोप इसी तरह जारी रहेगा।
    • छह दिनों का ऑरेंज अलर्ट: लगातार उच्च तापमान और गर्म हवाओं (लू) के चलने की आशंका के कारण अगले छह दिनों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी न होने पर घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।

    मैदानों में बढ़ा बिजली-पानी का संकट

    • पहाड़ी इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान: मैदानी इलाकों की गर्म हवाओं का असर अब पहाड़ों पर भी दिखने लगा है। उत्तराखंड के नैनीताल और हिमाचल प्रदेश के कई निचले पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर तापमान सामान्य से 5 से 6 डिग्री ऊपर चल रहा है।
    • संसाधनों पर दबाव: भीषण गर्मी के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली और पानी की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। कई राज्यों में अघोषित बिजली कटौती और पानी की किल्लत ने आम जनता की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक प्री-मानसून की गतिविधियां या कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय नहीं होता, तब तक उत्तर और मध्य भारत को इस भीषण तपन से राहत मिलना नामुमकिन है।

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