पश्चिम बंगाल के सबसे व्यस्त रेलवे टर्मिनलों में से एक, हावड़ा स्टेशन के बाहरी परिसर और आसपास के इलाकों में रविवार (17 मई 2026) को एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान (Anti-Encroachment Drive) चलाया गया। हावड़ा नगर निगम (HMC), पुलिस और रेलवे प्रशासन की संयुक्त मौजूदगी में कड़े सुरक्षा घेरे के बीच अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और ढांचों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया।
इस प्रशासनिक कार्रवाई और इससे उपजे विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. कार्रवाई का कारण: यातायात और सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन के मुताबिक, हावड़ा स्टेशन के बाहर बंकिम सेतु और उससे सटे बस स्टैंड व मुख्य सड़कों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हो गए थे।
- भीषण जाम से मुक्ति: इन अवैध दुकानों और फेरीवालों (Hawkers) के कारण स्टेशन के बाहर चौबीसों घंटे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती थी, जिससे यात्रियों, बसों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों को निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ती थी।
- यात्री सुरक्षा: स्टेशन के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स के पास अतिक्रमण के चलते सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में भी पुलिस को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
2. बुलडोजर ऐक्शन और भारी पुलिस बल की तैनाती
रविवार सुबह ही प्रशासनिक अधिकारी कई जेसीबी (JCB) मशीनों और बुलडोजर के साथ हावड़ा स्टेशन रोड पहुंचे।
- अवैध ढांचे ध्वस्त: सड़कों के किनारे तिरपाल, बांस और कंक्रीट से अस्थायी व स्थायी रूप से बनाई गईं सैकड़ों दुकानों, फूड स्टॉल्स और काउंटरों को पूरी तरह तोड़ दिया गया।
- कड़ी सुरक्षा: कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के हिंसक विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए हावड़ा सिटी पुलिस के रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। पूरे इलाके को पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर घेर लिया था।
3. भड़के दुकानदार: “बिना नोटिस उजाड़ दिया आशियाना”
इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय छोटे व्यापारियों और दुकानदारों में भारी गुस्सा और निराशा देखी गई।
- आजीविका का संकट: प्रभावित दुकानदारों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें अपनी दुकानें हटाने या सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए पर्याप्त समय या पूर्व नोटिस नहीं दिया था। कई दुकानदारों का सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।
- पुनर्वास की मांग: दुकानदारों का कहना है कि वे दशकों से यहां व्यापार कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था (Rehabilitation) के उन्हें इस तरह उजाड़ना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
4. राजनीतिक रंग और आगामी कदम
हावड़ा स्टेशन के बाहर हुए इस बड़े एक्शन ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने जहां इसे बिना योजना के की गई दमनकारी कार्रवाई बताया है, वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि स्टेशन परिसर और मुख्य रास्तों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखा जाएगा। भविष्य में यहां दोबारा अवैध कब्जे न हों, इसके लिए पुलिस की नियमित गश्त और निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।


