दुनिया एक बार फिर एक खतरनाक स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार (17 मई 2026) को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और पड़ोसी देश युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) यानी ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। हालांकि, एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह फिलहाल ‘महामारी आपातकाल’ (Pandemic Emergency) के मानदंडों को पूरा नहीं करता।
मौतों का आंकड़ा और संक्रमण की रफ्तार
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) और WHO के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है:
- मृतकों की संख्या: इस नए प्रकोप के कारण अब तक कम से कम 87 से 88 लोगों की मौत हो चुकी है। केवल कांगो के इतूरी (Ituri) प्रांत में ही 80 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं।
- संदिग्ध मामले: वायरस की चपेट में आने वाले संदिग्ध मरीजों की संख्या बढ़कर 336 तक पहुंच गई है, जिनमें से 13 मामलों की प्रयोगशाला (Lab) में पुष्टि हो चुकी है।
- राजधानियों तक पहुंचा असर: कांगो के इतूरी प्रांत के अलावा यह वायरस कांगो की घनी आबादी वाली राजधानी किनशासा और युगांडा की राजधानी कंपाला तक पहुंच चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
बेहद दुर्लभ और खतरनाक ‘बुंडिबुग्यो’ स्ट्रेन
इस बार फैले इबोला आउटब्रेक ने चिकित्सा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह इबोला का बेहद दुर्लभ ‘बुंडिबुग्यो’ (Bundibugyo virus) स्ट्रेन है।
इबोला के सामान्य ‘जायरे’ स्ट्रेन के लिए तो वैक्सीन उपलब्ध हैं, लेकिन इस बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए वर्तमान में कोई भी स्वीकृत वैक्सीन (टीका) या विशिष्ट एंटीवायरल उपचार मौजूद नहीं है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे नियंत्रित करने को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं।
संक्रमण फैलने के कारण और चुनौतियां
- शारीरिक तरल पदार्थ: इबोला एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के पसीने, खून, उल्टी या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों (Bodily Fluids) के सीधे संपर्क में आने से फैलती है।
- स्वास्थ्य कर्मियों की मौत: प्रभावित इलाकों में कम से कम 4 स्वास्थ्य कर्मियों की भी ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है, जो अस्पताल के भीतर संक्रमण फैलने (Healthcare-associated transmission) की ओर इशारा करता है।
- हिंसा और पलायन: कांगो के इतूरी प्रांत में सक्रिय इस्लामिक स्टेट समर्थित उग्रवादियों की हिंसा, खनन (Mining) के चलते लोगों का लगातार पलायन और खराब बुनियादी ढांचा इस बीमारी की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्क ट्रैकिंग) में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
WHO और ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (MSF) जैसी वैश्विक संस्थाएं बड़े पैमाने पर राहत और स्क्रीनिंग कार्यों में जुट गई हैं, ताकि इसे और अधिक देशों में फैलने से समय रहते रोका जा सके।


