पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गंभीर सैन्य तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। लगभग 20,000 टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आ रहा ‘सिमी’ (Symi) नामक विशाल मालवाहू जहाज गुजरात के कच्छ जिले में स्थित कांडला बंदरगाह (दीनदयाल पोर्ट) पर सुरक्षित पहुंच गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को किया पार
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के नजरिए से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सबसे संवेदनशील और खतरनाक जलमार्ग माना जाता है। अमेरिका-इजरायल और इराण के बीच चल रहे टकराव के कारण इस मार्ग पर भारी नाकेबंदी और तनाव का माहौल है।
- ‘मार्शल आयलंड्स’ के ध्वज वाले इस ‘सिमी’ टैंकर ने 13 मई 2026 को इस रणनीतिक जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया था और अब यह भारतीय तट पर पहुंच चुका है।
- इस जहाज पर कुल 21 क्रू मेंबर्स सवार हैं, जिनमें 8 यूक्रेनी और 13 फिलिपिनो नागरिक शामिल हैं। यह जहाज कतर के रास लफान टर्मिनल से गैस लेकर रवाना हुआ था।
भारत के लिए यह खेप क्यों है बेहद जरूरी?
पिछले ढाई महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते भारत की घरेलू रिफाइनरियों और एलपीजी आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में गिरावट: संकट के कारण भारत का कुल रणनीतिक कच्चा तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) लगभग 15 फीसदी तक गिर गया था। यह भंडार 107 मिलियन बैरल से घटकर 91 मिलियन बैरल पर आ गया था। ऐसे समय में रसोई गैस की यह बड़ी खेप आना देश में एलपीजी की किल्लत को दूर करने में संजीवनी का काम करेगी।
कूटनीतिक जीत और नौसेना का पहरा
इस संकटकालीन मार्ग से भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालना भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतरीन तालमेल का नतीजा है:
- जहाजरानी मंत्रालय (DG Shipping), विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मिशन के लिए चोख व्यवस्था की थी।
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के साथ समन्वय स्थापित कर भारतीय नौसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इन जहाजों को फारस की खाड़ी से सुरक्षित निकालने के लिए एस्कॉर्ट और लगातार सहायता प्रदान कर रही हैं।
एक और जहाज ‘एमवी सनशाइन’ भी मार्ग पर
भारत की ओर कुल 66,392 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर दो जहाज रवाना हुए थे। ‘सिमी’ के कांडला पहुंचने के अलावा, वियतनाम के ध्वज वाला दूसरा टैंकर ‘एमवी सनशाइन’ (MV Sunshine) भी लगभग 46,427 टन एलपीजी लेकर न्यू मंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है, जिसने होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित पार कर लिया है।
हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान भरोसा दिलाया था कि ईरान होर्मुज जलमार्ग में सुरक्षा के रक्षक के रूप में अपना ऐतिहासिक कर्तव्य निभाता रहेगा और भारत जैसे मित्र देश व्यापारिक सुरक्षा के लिए उस पर पूरा भरोसा कर सकते हैं। इसी कूटनीतिक आश्वासन का सकारात्मक परिणाम अब भारतीय तटों पर देखने को मिल रहा है।


