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    हंता वायरस: क्रूज के छह यात्री क्वारंटीन, अब तक कितनी मौतें? WHO की यह एडवाइज़री

    कोरोना महामारी की यादों के बीच दुनिया इस समय ‘हंतावायरस’ (Hantavirus) के एक नए और दुर्लभ प्रकोप का सामना कर रही है। एक अंतरराष्ट्रीय लग्जरी क्रूज जहाज ‘एमवी होंडियस’ (MV Hondius) पर फैले इस वायरस के कारण वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है। इस क्रूज से सुरक्षित निकाले गए छह यात्रियों को विशेष विमान के जरिए ऑस्ट्रेलिया लाया गया है, जहां उन्हें पर्थ के पास तीन सप्ताह (21 दिन) के लिए कड़े क्वारंटीन में रखा गया है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, इस क्रूज पोत से जुड़े हंतावायरस के प्रकोप के कारण अब तक कुल 3 लोगों की मौत हो चुकी है। आइए जानते हैं कि इस समय वैश्विक स्थिति क्या है और ऑस्ट्रेलिया ने इतने कड़े कदम क्यों उठाए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया में तीन सप्ताह का कड़ा क्वारंटीन

    नीदरलैंड से एक विशेष निकासी विमान (Repatriation Flight) के जरिए इन छह यात्रियों को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ लाया गया। इस समूह में चार ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, एक स्थायी निवासी और एक न्यूजीलैंड का नागरिक शामिल है। हालांकि, रवानगी से पहले इन सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी और इनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन एहतियात के तौर पर इन्हें बुल्सब्रुक स्थित एक विशेष क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है (जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था)।

    ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने बताया कि इस वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने की अवधि) 42 दिनों तक का हो सकता है। सुरक्षा के मद्देनजर, उड़ान के दौरान यात्रियों, चालक दल और डॉक्टर समेत सभी लोगों ने फुल पीपीई (PPE) किट पहन रखी थी। विमान के चालक दल ने भी खुद को दो सप्ताह के लिए स्वेच्छा से क्वारंटीन कर लिया है।

    अब तक कितनी मौतें और क्या हैं आंकड़े?

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी (CDC) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार:

    • इस क्रूज जहाज से जुड़े हंतावायरस के अब तक कुल 11 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 8 मामलों की प्रयोगशाला (Lab) में पुष्टि हो चुकी है, 2 संभावित मामले हैं और 1 मामला अनिर्णायक है।
    • इस वायरस के कारण अब तक 3 यात्रियों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में दो लैब-पुष्ट मरीज थे, जबकि एक संभावित मामला था।
    • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इस प्रकोप की मृत्यु दर (Case Fatality Rate) फिलहाल लगभग 27 से 38 प्रतिशत के बीच देखी जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

    ‘एंडीज स्ट्रेन’ ने बढ़ाई चिंता: इंसानों से इंसानों में फैलने का खतरा

    यह क्रूज जहाज 1 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था और अंटार्कटिका व दक्षिण अटलांटिक के कई द्वीपों से होकर गुजरा था। जांच में सामने आया है कि इस प्रकोप के लिए हंतावायरस का ‘एंडीज स्ट्रेन’ (Andes Strain) जिम्मेदार है।

    आमतौर पर हंतावायरस चूहों और कृंतकों के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है और इंसानों से इंसानों में नहीं जाता। लेकिन ‘एंडीज स्ट्रेन’ हंतावायरस का एकमात्र ऐसा रूप है, जो बहुत ही दुर्लभ मामलों में करीबी और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ और दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां इसे लेकर बेहद सतर्क हैं।

    WHO की एडवाइज़री

    विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि आम वैश्विक आबादी के लिए इस वायरस का खतरा बेहद कम है, लेकिन इस क्रूज पर सवार रहे यात्रियों और चालक दल के लिए जोखिम मध्यम है। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों को इस क्रूज से लौटे यात्रियों की 42 दिनों तक निगरानी और क्वारंटीन करने की सलाह दी है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और उल्टी-दस्त के बाद अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ (HPS) होना शामिल है।

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