पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के प्रचार के दौरान सियासी पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच जुबानी जंग ने मुकाबले को और भी कड़ा बना दिया है।
ममता बनर्जी: ‘बंगाल के बाद दिल्ली की बारी’
कोलकाता के चौरंगी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने एलान किया कि बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उनका अगला लक्ष्य दिल्ली होगा। उन्होंने कहा, “मैं सत्ता नहीं चाहती, मैं दिल्ली में भाजपा का विनाश चाहती हूँ। एक बार हम बंगाल जीत लें, फिर हम सभी विपक्षी दलों को साथ लाकर केंद्र से भाजपा को उखाड़ फेंकेंगे।”
- उन्होंने चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों पर भाजपा के ‘एजेंट’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। ममता ने चेतावनी दी कि वह उन सभी अधिकारियों के नाम नोट कर रही हैं जो पक्षपात कर रहे हैं।
पीएम मोदी: ‘टीएमसी से आजादी की जरूरत’
वहीं, उत्तर 24 परगना के दमदम में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पलटवार किया। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल कभी देश का नेतृत्व करता था, लेकिन टीएमसी के ‘सिंडिकेट राज’ ने इसे पीछे धकेल दिया है। उन्होंने नारा दिया कि बंगाल के विकास और इसके खोए हुए गौरव को लौटाने के लिए “टीएमसी से आजादी” अनिवार्य है।
- प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने बंगाल को भ्रष्टाचार और डर का टापू बना दिया है। उन्होंने पहले चरण में हुए 92% से अधिक मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारी वोटिंग बदलाव की तड़प को दर्शाती है और जनता ने टीएमसी को विदा करने का मन बना लिया है।
मुख्य चुनावी मुद्दे
| पक्ष | ममता बनर्जी (TMC) | नरेंद्र मोदी (BJP) |
| नारा | ‘भाजपा का विनाश’ | ‘टीएमसी से आजादी’ |
| मुद्दे | केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, बाहरी बनाम भीतरी | भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज, घुसपैठ |
| लक्ष्य | दिल्ली की सत्ता में बदलाव | बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ का निर्माण |
रिकॉर्ड मतदान और मनोवैज्ञानिक युद्ध
पहले चरण में दर्ज किए गए 92.6% मतदान ने दोनों पार्टियों को अपनी-अपनी जीत के दावे करने का मौका दे दिया है। जहां भाजपा इसे ‘सत्ता परिवर्तन’ की लहर बता रही है, वहीं टीएमसी इसे अपनी लोक-कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जनता का अटूट विश्वास करार दे रही है। 4 मई को होने वाली मतगणना यह तय करेगी कि बंगाल की जनता ने ‘दिल्ली विजय’ के ममता के सपने पर मुहर लगाई है या मोदी के ‘बदलाव’ के आह्वान पर।


