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    भ्रष्टाचार के डर से AIADMK ने किया सरेंडर, राहुल गांधी ने बोला तीखा हमला

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के तहत कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कन्याकुमारी में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने क्षेत्रीय दल AIADMK पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने अपनी विचारधारा पूरी तरह से भाजपा के सामने सरेंडर कर दी है।


    राहुल गांधी के संबोधन की मुख्य बातें

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में तमिल संस्कृति और क्षेत्रीय गौरव को केंद्र में रखा। राहुल गांधी ने कहा कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी (AIADMK) अब स्वतंत्र नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और जांच एजेंसियों के डर से AIADMK ने भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

    • राहुल गांधी ने संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि RSS और भाजपा पूरे देश में एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही विचारधारा थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि तमिल भाषा और संस्कृति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी भारत की कोई और भाषा।”
    • कांग्रेस नेता ने कहा कि तमिलनाडु का भविष्य नागपुर (RSS मुख्यालय) से तय नहीं होना चाहिए। इसे तमिलनाडु के लोग ही तय करेंगे।

    चुनावी समीकरण और गठबंधन

    राहुल गांधी की यह रैली DMK-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    1. क्षेत्रीय अस्मिता: राहुल गांधी लगातार तमिल पहचान और भाषाई गौरव के मुद्दे को उठा रहे हैं, जो इस चुनाव में एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बनकर उभरा है।
    2. गठबंधन की मजबूती: रैली के दौरान राहुल गांधी के साथ DMK के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे, जो गठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है।
    3. भाजपा की चुनौती: भाजपा इस बार तमिलनाडु में अपनी पैठ बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, जिसका मुकाबला करने के लिए राहुल गांधी राज्य के दौरे पर हैं।

    “न्याय” और आर्थिक वादे

    राहुल गांधी ने अपनी न्याय योजना (NYAY) का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनका गठबंधन सत्ता में आता है, तो गरीबों के खातों में सीधे पैसे भेजे जाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और जीएसटी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि इन नीतियों ने राज्य के छोटे व्यापारियों को काफी नुकसान पहुँचाया है।

    कन्नियाकुमारी की इस रैली के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में कांग्रेस और उसके सहयोगियों की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है, जबकि AIADMK-BJP गठबंधन को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

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