पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बड़ी घटना सामने आई है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी सेना (IRGC) ने भारत आ रहे 14 जहाजों के काफिले को रोक दिया है। इस दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरानी सुरक्षाबलों ने एक जहाज पर सीधी फायरिंग की।
घटना का विवरण
- इंटरसेप्शन: 18 अप्रैल 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे 14 जहाजों के एक काफिले को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने बीच रास्ते में रोक लिया।
- फायरिंग की घटना: खबरों के अनुसार, ईरानी गनबोट्स ने चेतावनी दिए बिना दो जहाजों पर फायरिंग की। इनमें से एक भारतीय ध्वज वाला जहाज (Indian-flagged vessel) था, जिसकी खिड़कियों के शीशे टूट गए। हमले के बाद यह जहाज वापस मुड़ने पर मजबूर हो गया।
- कार्गो का प्रकार: इन जहाजों में भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण कच्चा तेल (Crude Oil), एलपीजी (LPG) और उर्वरक (Fertilizers) लदा हुआ है।
जहाजों की वर्तमान स्थिति
- 13 जहाज वापस लौटे: फायरिंग और ईरानी नौसेना की सख्ती के बाद 13 जहाज वापस फारस की खाड़ी के अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर लौट गए हैं। इनमें से कई जहाज ‘लारक द्वीप’ (Larak Island) के पास फंसे हुए हैं और ईरानी नौसेना की क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं।
- एक जहाज सफल रहा: तमाम तनाव के बीच, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के लिए कच्चा तेल लेकर आ रहा एक भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा और अब भारत की ओर बढ़ रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हलचल
इस घटना ने नई दिल्ली में हलचल तेज कर दी है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी राजदूत को तलब कर इस घटना पर “गहरी चिंता” व्यक्त की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
संकट का कारण
यह तनाव तब बढ़ा है जब ईरान ने अमेरिका द्वारा अपनी बंदरगाहों की नाकेबंदी के विरोध में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा की। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में किसी भी जहाज की आवाजाही को “दुश्मन के साथ सहयोग” माना जाएगा।
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी 90% एलपीजी और भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत में ऊर्जा संकट और कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।


