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    होर्मुज संकट: एक मिसाइल से जहाजों को डुबो देंगे, ईरान की अमेरिका को सीधी धमकी

    पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। आज 16 अप्रैल 2026 को ईरान ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना ने अपनी गतिविधियां या नाकेबंदी नहीं रोकी, तो ईरान अपनी पहली ही मिसाइल से अमेरिकी युद्धपोतों को समुद्र में दफन कर देगा।


    होर्मुज की नाकेबंदी और ईरान का आक्रामक रुख

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। अमेरिका द्वारा इस क्षेत्र में सैन्य नाकेबंदी के जवाब में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने सरकारी टेलीविजन पर कड़े शब्दों में चेतावनी दी:

    • मिसाइल हमला: रजाई ने कहा, “अमेरिका होर्मुज का पुलिस बनने की कोशिश न करे। हमारे पास ऐसी मिसाइलें हैं जो पहले ही प्रहार में अमेरिकी जहाजों को डुबोने की क्षमता रखती हैं।”
    • बंधक बनाने की चेतावनी: ईरान ने यह भी धमकी दी है कि यदि अमेरिका ने जमीनी आक्रमण (Ground Invasion) करने की हिमाकत की, तो ईरान हजारों अमेरिकी सैनिकों को बंधक बना लेगा और हर बंधक की रिहाई के बदले एक अरब डॉलर वसूलेगा।

    युद्ध के मुहाने पर क्षेत्र

    यह तनाव पिछले सात हफ्तों से चल रहे युद्ध और हाल ही में शांति वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा है।

    1. अमेरिकी घेराबंदी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की सैन्य नाकेबंदी का आदेश दिया है ताकि ईरानी तेल का निर्यात पूरी तरह रोका जा सके।
    2. वैश्विक असर: इस संकट के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक बाजार अस्थिर हो गया है।
    3. नाकेबंदी का असर: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कई जहाजों को बलपूर्वक वापस मोड़ा गया है, जिससे क्षेत्र में कभी भी सीधी भिड़ंत की आशंका बनी हुई है।

    विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय चिंता

    ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वर्तमान युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। वहीं, अमेरिका ने साफ किया है कि वह ईरान की वित्तीय और ऊर्जा गतिविधियों को पूरी तरह रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज के रास्ते को पूरी तरह बंद किया गया या वहां कोई मिसाइल हमला हुआ, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी में तैनात इन दो महाशक्तियों के बेड़ों पर टिकी हैं।

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