आज यानी 16 अप्रैल 2026 को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। केंद्र सरकार संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जो देश के चुनावी ढांचे और प्रतिनिधित्व व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखते हैं। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
प्रमुख विधेयक और उनके उद्देश्य
संसद में पेश किए जा रहे ‘तीन-विधेयक पैकेज’ में निम्नलिखित शामिल हैं:
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वृद्धि करने और संविधान के अनुच्छेद 81 व 82 में बदलाव करने का प्रस्ताव रखता है।
- परिसीमन विधेयक, 2026: इसके माध्यम से एक नए परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा जो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करेगा।
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: यह कानून केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करेगा।
क्या होगा बदलाव?
- लोकसभा का विस्तार: प्रस्तावित सुधारों के तहत लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है। इसमें राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य शामिल होंगे।
- महिला आरक्षण का कार्यान्वयन: 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की योजना है। नए प्रस्ताव के अनुसार, अब इसके लिए अगली जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाया जा सकता है।
- सीटों का गणित: यदि लोकसभा में 850 सीटें होती हैं, तो उनमें से लगभग 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
चुनौतियां और राजनीतिक गतिरोध
सरकार जहां इसे महिला सशक्तीकरण और बेहतर प्रतिनिधित्व की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं।
- दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा: विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है। उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे यूपी और बिहार) में सीटों की संख्या अधिक बढ़ेगी, जिससे राजनीतिक असंतुलन पैदा हो सकता है।
- विपक्ष की मांग: कांग्रेस और अन्य दलों ने महिलाओं के लिए आरक्षण का स्वागत तो किया है, लेकिन परिसीमन के मौजूदा स्वरूप और बिना उचित चर्चा के इसे पेश करने का विरोध करने का निर्णय लिया है।
आज का दिन भारतीय राजनीति में ‘सीटों के भूगोल’ और ‘महिलाओं की भागीदारी’ की एक नई इबारत लिख सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस चर्चा में भाग लेंगे, जबकि देश भर से सैकड़ों महिलाएं इस ऐतिहासिक सत्र की गवाह बनने के लिए संसद दीर्घा में मौजूद रहेंगी।


